डीम्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश से डिग्री की मान्यता और करियर पर चिंता
सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में डीम्ड यूनिवर्सिटी के मुद्दे को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच बैच 2025 के मेडिकल छात्रों ने भी खुलकर अपनी असंतुष्टि व्यक्त की है। छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया था, तब उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि उनका संस्थान पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से संबद्ध है और इसी भरोसे पर उन्होंने कठिन नीट परीक्षा पास कर यहां एडमिशन लिया।
छात्रों के अनुसार, उनके बैच में देश के विभिन्न राज्यों जैसे राजस्थान, केरल, हरियाणा सहित अन्य प्रदेशों से विद्यार्थी ऑल इंडिया कोटा के माध्यम से पहुंचे हैं। नेशनल मेडिकल काउंसिल के काउंसलिंग पोर्टल पर भी संस्थान को पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से संबद्ध सरकारी कॉलेज के रूप में दर्शाया गया था, जबकि डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए अलग पोर्टल होता है। ऐसे में बीच सत्र में बिना पूर्व सूचना संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी में परिवर्तित किया जाना छात्रों के लिए “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया जा रहा है। मेडिकल छात्रों का तर्क है कि सरकारी विश्वविद्यालय से प्राप्त एमबीबीएस डिग्री की विश्वसनीयता और मूल्य अधिक होता है, जबकि डीम्ड यूनिवर्सिटी से डिग्री की वैल्यू कम हो सकती है, जिससे उनके भविष्य और करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने इस बदलाव को “छात्रों के साथ अन्याय” और “बिना परामर्श लिया गया फैसला” करार दिया।
छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि बैच 2025, जिसने पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के अधीन प्रवेश लिया था, उसे उसी संबद्धता के तहत अपनी पढ़ाई जारी रखने दी जाए। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में समय की भारी कमी रहती है, इसके बावजूद वे अपनी पढ़ाई से समय निकालकर केवल यह संदेश देने आए हैं कि वे इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे आने वाले दिनों में भी शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेंगे। उनकी प्रमुख मांग है कि डीम्ड यूनिवर्सिटी के निर्णय को वापस लेकर पुनः पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से संबद्धता बहाल की जाए, ताकि उनकी डिग्री की मान्यता और भविष्य सुरक्षित रह सके।