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मेडिकल छात्र की रहस्यमयी मौत, परीक्षा तनाव पर उठे सवाल

फाइनल एमबीबीएस परीक्षा से पहले दबाव में था छात्र

कोलकाता : College of Medicine and JNM Hospital के अंतिम वर्ष के छात्र पुलक हलदर की रहस्यमयी मौत की जांच जारी है। इस बीच परिसर सूत्रों ने संकेत दिया है कि 5 मार्च से शुरू होने वाली अंतिम एमबीबीएस परीक्षा से पहले वह गहरे अध्ययन दबाव में थे।

सूत्रों के अनुसार, पुलक परीक्षा को लेकर बेहद चिंतित थे और उसे देने में अनिच्छा जता रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने हाल ही में अवसाद के लक्षणों के कारण एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से भी परामर्श लिया था। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

इस वर्ष पहली बार अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों को छह प्रमुख क्लीनिकल विषयों—मेडिसिन, गायनेकोलॉजी, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, ईएनटी और ऑप्थाल्मोलॉजी—की परीक्षा देनी है। इनमें ईएनटी और ऑप्थाल्मोलॉजी पहले तीसरे वर्ष का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन अब इन्हें अंतिम वर्ष में शामिल कर दिया गया है।

छात्रों का कहना है कि पूर्व शैक्षणिक सत्रों में चार विषयों को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय मिलता था। लेकिन इस बार छह विषयों को महज 11 महीनों में पूरा करना पड़ा है। National Medical Commission ने इस वर्ष से ‘नेशनल एग्जिट टेस्ट’ (NExT) लागू करने का प्रस्ताव रखा था, जो बाद में कानूनी, आधारभूत संरचना और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण स्थगित कर दिया गया।

छात्रों के अनुसार, इस अनिश्चितता ने भी शैक्षणिक दबाव बढ़ाया। वर्तमान में सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षाएं कड़ी निगरानी में आयोजित की जा रही हैं। परीक्षा कक्षों से लाइव-स्ट्रीमिंग की व्यवस्था है और छात्रों की सघन तलाशी ली जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा में बढ़ते शैक्षणिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

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