कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों के बीच हिंसा को लेकर विवाद शुक्रवार को भी जारी रहा। गुरुवार को 4 नंबर गेट के पास ऐतिहासिक प्रतीकात्मक संरचना को नुकसान पहुंचाए जाने के विरोध में वामपंथी छात्र संगठनों ने कैंपस के भीतर और बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘आजादी’ के नारे लगाए जाने और बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के कैंपस में प्रवेश के आरोपों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया।
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के हाथों में विवादित पोस्टर और पर्चे भी देखे गए। कैंपस में इस तरह के राजनीतिक और उग्र नारों को लेकर शिक्षकों और छात्रों के एक वर्ग ने नाराजगी जताई। वहीं, जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) भी इस मुद्दे पर दो धड़ों में बंटता नजर आया। एक पक्ष ने बाहरी लोगों की मौजूदगी का विरोध करते हुए प्रदर्शन से दूरी बनाई, जबकि दूसरे पक्ष ने विश्वविद्यालय की परंपरा और परिसर पर कथित हमले के खिलाफ मुद्दा-आधारित आंदोलन का समर्थन किया।
गौरतलब है कि बुधवार की रात 'फेटसू' की जीबी बैठक को लेकर एसएफआई और एबीवीपी समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद गुरुवार को दोनों पक्षों के जुलूस के दौरान 4 नंबर गेट के पास तनाव बढ़ गया था। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के करीब 37 घंटे बाद शिकायत दर्ज की जाने तथा रात में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रशासन ने आंतरिक जांच समिति गठित करने और कैंपस के बाहर पुलिस आउटपोस्ट बनाने की बात कही है।
JUTA ने कुलपति को सौंपा पत्र
इधर, जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने कुलपति को पत्र देकर 19 और 20 अगस्त की घटनाओं में कथित बाहरी लोगों द्वारा किए गए हमले और तोड़फोड़ की निंदा की। 'जुटा' ने 19 अगस्त की रात हुई आगजनी, हमले और हिंसा के मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की मांग की। साथ ही विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और शिक्षा व शोध का स्वस्थ माहौल बनाए रखने के लिए सभी हितधारकों की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन ने इस संबंध में तत्काल स्पष्ट सुरक्षा योजना तैयार करने की अपील की है।