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मतुआ गढ़ों में 'नामों की भारी कटौती' से हड़कंप !

हजारों लोगों को उनकी 'नागरिकता' खत्म होने की आशंका, ठाकुरबाड़ी पहुंचे

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल निर्वाचन आयोग ने शनिवार को बहुप्रतीक्षित अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची के सामने आते ही उत्तर 24 परगना के बनगांव और नदिया जैसे मतुआ बहुल इलाकों में हड़कंप मच गया है। दस्तावेजों की कमी के कारण हजारों मतुआ सदस्यों के नाम मतदाता सूची से बाहर हो गये हैं, जिससे समुदाय में उनकी 'नागरिकता' खत्म होने की दहशत व्याप्त हो गयी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बनगांव मतुआ गढ़ में लगभग 1.20 लाख मतुआ सदस्यों को सुनवाई के लिए नोटिस दी गयी थी, लेकिन इनमें से 60 हजार से अधिक लोग जरूरी दस्तावेज न होने के डर से सुनवाई में शामिल ही नहीं हुए। आरोप है कि प्रकाशित सूची में इसके गंभीर परिणाम ​देख जा रहे हैं।

संकट के समय भाजपा ने मतुआओं का साथ छोड़ दिया : ममता बाला ठाकुर

टीएमसी सांसद ममताबाला ठाकुर के अनुसार, बनगांव की चार प्रमुख विधानसभा सीटों से लगभग 80 से 85 प्रतिशत मतुआ सदस्यों के नाम काट दिये गये हैं। अंतिम सूची जारी होने से पहले ही शुक्रवार को नदिया और बर्दवान से आये मतुआ सदस्यों ने ठाकुरबाड़ी में ममताबाला ठाकुर के सामने रोते हुए अपनी व्यथा सुनायी। लोगों को डर है कि नाम कटने से उनके आधार, पैन और बैंक खाते बंद हो जाएंगे। ममताबाला ठाकुर ने केंद्र की भाजपा सरकार और स्थानीय सांसद शांतनु ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि संकट के समय भाजपा ने मतुआओं का साथ छोड़ दिया है। सामूहिक विलोपन के विरोध में ऑल इंडिया मतुआ महासंघ की ओर से आंदोलन करने की भी बात कही गयी। बताया गया है कि 1 मार्च को कोलकाता में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर संगठन द्वारा प्रदर्शन किया जायेगा। 2 मार्च को पूरे बंगाल में सड़क जाम और विरोध सभाएं की जायेंगी।

नदिया जिले में 41.45 लाख मतदाता, हजारों नाम गायब

मतुआओं का गढ़ माने जाने वाले नदिया जिले की अंतिम सूची के अनुसार अब कुल मतदाताओं की संख्या 41 लाख 45 हजार रह गयी है। स्थानांतरण और दस्तावेजों के मिलान न होने के कारण सूची में बड़े बदलाव हुए हैं। रानाघाट दक्षिण (मतुआ और सीमावर्ती क्षेत्र) से 7,125 नाम कटे, कल्याणी से 9,030 नाम सूची से बाहर हुए। चाकदह व रानाघाट उत्तर-पूर्व से क्रमशः 5,860 और 6,400 नाम हटाये गया हैं। कृष्णगंज से 2,535 नाम काटे गये हैं। इन विधानसभा क्षेत्रों में हजारों नाम सूची से बाहर किये गये हैं। ये क्षेत्र मतुआ समुदाय के गढ़ माने जाते हैं।

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