कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी संघर्ष के बीच इस बार 21 जुलाई का 'शहीद दिवस' केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दोनों गुटों के लिए शक्ति परीक्षण का सबसे बड़ा मंच बन गया है। एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला कालीघाट गुट धर्मतला में पारंपरिक सभा आयोजित करने की अनुमति के लिए कोलकाता हाईकोर्ट पहुंचा है, तो दूसरी ओर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मेयो रोड स्थित गांधी प्रतिमा के निकट समानांतर रैली आयोजित करने की घोषणा कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों सभाओं में उमड़ने वाली भीड़, वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की भागीदारी यह तय करेगी कि संगठन और जमीनी स्तर पर किस गुट की पकड़ अधिक मजबूत है। ऐसे समय में, जब दोनों पक्ष चुनाव आयोग के समक्ष खुद को 'वास्तविक तृणमूल कांग्रेस' साबित करने की कोशिश में जुटे हैं, 21 जुलाई का शक्ति प्रदर्शन उनकी राजनीतिक दावेदारी को भी मजबूती या कमजोरी दे सकता है।
मामले को और संवेदनशील इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि मध्य कोलकाता के बड़े हिस्से में 30 अगस्त तक बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। धर्मतला में सभा की अनुमति के लिए ममता गुट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जबकि ऋतब्रत गुट ने मेयो रोड पर कार्यक्रम की तैयारियां तेज कर दी हैं।
शनिवार को जिला समितियों के गठन के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि अब उनकी पहली प्राथमिकता 21 जुलाई के कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सफल बनाना है तथा इसके लिए संगठन कोई कसर नहीं छोड़ेगा। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि 'शहीद दिवस' हर हाल में आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि यदि मंच लगाने की अनुमति नहीं भी मिली, तो भी कार्यक्रम होगा और जरूरत पड़ने पर वह रिक्शे पर खड़े होकर भी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस बार 21 जुलाई का 'शहीद दिवस' तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के लिए अपनी वास्तविक ताकत, जनाधार और संगठनात्मक पकड़ साबित करने की निर्णायक 'अग्निपरीक्षा' बन गया है।