विचार गोष्ठी में हिस्सा लेते वक्ता 
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मरिचझांपि की त्रासदी और शरणार्थियों की पीड़ा पर कोलकाता में विचार गोष्ठी


केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : साहित्य-सांस्कृतिक मंच दिलचस्प पहल की ओर से उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा स्थित आदिवासी पाड़ा में आयोजित विचार गोष्ठी में देश विभाजन के बाद पूर्व पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए शरणार्थियों की समस्याओं पर गंभीर विमर्श हुआ। गोष्ठी में वक्ताओं ने गरीब दलित शरणार्थियों के प्रति दशकों से हो रहे अन्याय और मरिचझांपि संहार की दबी सच्चाई को उजागर किया।

शरणार्थियों पर अन्याय और राजनीति

वरिष्ठ पत्रकार गंगा प्रसाद ने कहा कि देश विभाजन के बाद शरणार्थियों की वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन्हें नई मुश्किलों में धकेला गया। लगातार उन पर जुल्म हुए और उन्हें वोट बैंक की राजनीति में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सुंदरवन के मरिचझांपि द्वीप पर 1979 में हुए शरणार्थी संहार को भारतीय इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि उस गोलीकांड में कितने लोगों की मौत हुई या कितने लापता हुए।

उपन्यास ने जिंदा रखी सच्चाई

कवि व उपन्यासकार नील कमल के उपन्यास “मरिचझांपि को छूकर बहती है जो नदी” को गोष्ठी का केंद्र माना गया। वक्ताओं ने कहा कि यह कृति मरिचझांपि और दंडकारण्य में शरणार्थियों के विस्थापन, यातना और संघर्ष को जीवंत कर देती है। नील कमल ने लगभग नौ–दस वर्षों तक सैकड़ों लोगों से मिलकर तथ्यों को संजोया और बीसियों बार घटनास्थलों का दौरा किया।

आंखों देखी दास्तान

गंगा प्रसाद ने बताया कि पुलिस गोलीकांड के दिनों वे मरिचझांपि में रिपोर्टिंग के लिए गए थे और शरणार्थियों की भयावह स्थिति देखी। डॉ. भोला प्रसाद सिंह ने भी उन दिनों के अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि शरणार्थियों को दंडकारण्य भेजना, जबरन बसाना और फिर मरिचझांपि में खुद बसने पर सरकारी दमन करना घोर अमानवीय कृत्य था।

व्यापक विमर्श और सहभागिता

विचार गोष्ठी में डॉ. भोला प्रसाद सिंह, पत्रकार-कवि सुशील कांति, डॉ. संदीप प्रसाद, डॉ. संजय राय, कार्तिक बासफोड़, डॉ. कलावती कुमारी, डॉ. अंजु सिंह, डॉ. आरती यादव, पिंकी कांति, डॉ. अनुप कुमार गुप्त, राहुल शर्मा, कवि सुशील शर्मा, नागेंद्र कुमार सहित अनेक बुद्धिजीवी उपस्थित थे। अधिकांश ने पुस्तक पढ़ने के बाद अपने अनुभव साझा किए और विश्व के अन्य देशों के शरणार्थियों की समस्याओं पर भी चर्चा की। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. भोला प्रसाद सिंह ने की, संचालन डॉ. संजय राय ने और धन्यवाद ज्ञापन सुशील कांति ने किया।

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