फ़ाइल फ़ोटो Mangalhat Traders Face Crisis as Footpath Business Ban Causes Losses Worth Crores in Howrah
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करोड़ों का हुआ नुकसान, सीएम के पास जायेंगे मंगलाहाट के व्यवसायी

अनिश्चितता को देखते हुए दूसरे राज्यों से आने वाले थोक खरीददारों और व्यापारियों का आना हुआ कम !

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा के ''मंगलाहाट'' के फुटपाथों पर व्यापार करने को लेकर जारी गतिरोध समाप्त नहीं हो सका। प्रशासन और व्यवसायियों के बीच कोई समझौता या समाधान का रास्ता नहीं निकलने के कारण लगातार दूसरे सप्ताह भी यहां कोई खरीद-बिक्री नहीं हो सकी। इस प्रशासनिक प्रतिबंध के चलते लगभग 10 हजार अस्थायी व्यवसायी प्रभावित हो गये हैं। मंगलाहाट व्यवसायी संगठन का दावा है कि सिर्फ फुटपाथ पर कारोबार बंद रहने की वजह से पिछले दो सप्ताह में कुल मिलाकर लगभग 7 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है। इस प्रतिबंध की मार न केवल छोटे और मध्यम दर्जे के व्यापारियों पर पड़ी है, बल्कि उनके साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों होजरी श्रमिक और अन्य कर्मचारी भी गहरे संकट और अनिश्चितता के मुहाने पर खड़े हो गए हैं। व्यवसायियों का कहना है कि मंगलाहाट एक अत्यंत प्राचीन थोक कपड़ा बाजार है। यहां प्रत्येक छोटे व्यवसायी के साथ औसतन 12 से 14 लोगों की आजीविका जुड़ी होती है, जिनमें उत्पादन यूनिट के दर्जी (सिलाई कारीगर), परिवहन कर्मी और अन्य मजदूर शामिल हैं। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो केवल फुटपाथ का व्यवसाय ही नहीं, बल्कि मंगलाहाट के सभी 9 हाट भवनों (मार्केट बिल्डिंग्स) सहित पूरे थोक कपड़ा बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान अनिश्चितता को देखते हुए दूसरे राज्यों से आने वाले थोक खरीददारों और व्यापारियों ने भी मंगलाहाट आना काफी कम कर दिया है।

व्यवसायी समिति ने कहा, परिस्थिति को लेकर सीएम से करेंगे अपील

मंगलाहाट सेंट्रल व्यवसायी समिति के अध्यक्ष मलय दत्त ने बताया कि हमने जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर सहित सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या के जल्द समाधान के लिए आवेदन किया है। अगर अगले सप्ताह भी व्यापार करने की अनुमति नहीं मिलती है, तो स्थिति बेहद भयावह और संकटजनक हो जाएगी। इसीलिए हमने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर इस मामले में राज्य नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं उन्होंने कहा कि वे अब मुख्यमंत्री के पास जाने को मजबूर हो गये हैं। वे लोग नवान्न में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को लेकर चिट्ठी देंगे। उन्होंने कहा कि उनके सामने विषम परिस्थितियां पैदा हो गयी हैं अतः वे उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री इसका समाधान निकालेंगे और उनकी रोजी-रोटी फिर से पटरी पर आ पायेगी।

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