कोलकाता/नई दिल्ली: बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और कालीघाट तृणमूल की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे समाजसेवी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से फोन पर बात कर उनकी सेहत की जानकारी ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक पिछले 17 दिनों से अनशन पर हैं। लगातार उपवास के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रमुख अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि ममता बनर्जी ने वांगचुक का हालचाल जानने के साथ उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बने रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ममता के इस समर्थन से आंदोलन को नैतिक बल मिला है और इसके लिए उन्होंने उनका आभार भी व्यक्त किया।
इससे पहले कालीघाट तृणमूल की सांसद सागरिका घोष और महुआ मोइत्रा भी वांगचुक के समर्थन में खुलकर सामने आ चुकी हैं। महुआ मोइत्रा ने एक ओर जहां आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई, वहीं दूसरी ओर वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील भी की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कदम विपक्षी राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। ऐसे समय में जब वांगचुक के आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर सीमित राजनीतिक समर्थन मिल रहा है, कालीघाट तृणमूल ने खुलकर उनके पक्ष में खड़े होने का संकेत दिया है।
माना जा रहा है कि इससे विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर नई राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है। फिलहाल वांगचुक का अनशन जारी है और उनके स्वास्थ्य पर सभी की नजर बनी हुई है।