नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित लोगों को अपना बचाव करने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यों में इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया।
बंगाल में एसआईआर ‘पीड़ितों’ के साथ यहां संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि वे उन कई अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें इस प्रक्रिया के कारण नुकसान उठाना पड़ा। बनर्जी ने दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमारे पीछे बैठे सभी लोग एसआईआर के पीड़ित हैं। मैं यहां लाखों लोगों को ला सकती थी।’’ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ने आरोप लगाया, "वे एसआईआर पीड़ितों को अपना बचाव करने का मौका नहीं दे रहे हैं।"
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और अन्य नेता इनमें से कुछ लोगों को लेकर एसआईआर मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के लिए पहुंचे थे, लेकिन बनर्जी बाद में विरोध जताते हुए बैठक से बीच में ही बाहर निकल गईं और दावा किया कि उनके प्रतिनिधिमंडल का अपमान हुआ है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया।
ममता ने असम में SIR नहीं करने पर उठाया सवाल
एसआईआर के समय पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने मंगलवार को सवाल किया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह प्रक्रिया केवल विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में ही क्यों की जा रही है, भाजपा शासित असम में क्यों नहीं, जहां चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा, "चुनाव वाले चार राज्यों में से तीन राज्यों में वे एसआईआर कर रहे हैं, लेकिन भाजपा शासित असम में नहीं।" बनर्जी ने पूछा, "चुनाव से ठीक पहले एसआईआर क्यों किया जा रहा है? क्या बिना किसी योजना के इसे 2-3 महीनों के भीतर करना संभव है?"
ममता और अभिषेक SIR पीड़ितों से मिले
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले चाणक्यपुरी के ‘बंग भवन’ में एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित लोगों से मुलाकात की और दावा किया कि वे पात्र मतदाता हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। बनर्जी ने उन्हें हर तरह के सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि उनके अधिकारों, गरिमा और लोकतांत्रिक आवाज के लिए यह लड़ाई तब तक नहीं रुकेगी जब तक न्याय नहीं मिल जाता।