कोलकाता : उत्तर बंगाल में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर कुछ नाराजगी जाहिर की थी। इसके जवाब में शाम को धर्मतल्ला के धरना मंच से ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने राष्ट्रपति को भी राजनीति के लिए आगे कर दिया है और वह उसके जाल में फंस गई हैं।
सिलीगुड़ी में अंतरराष्ट्रीय संताली सम्मेलन में शामिल होने के दौरान राष्ट्रपति ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर असंतोष जताया था। इसके जवाब में ममता ने कहा, 'आई एम सॉरी मैडम, आपके प्रति मेरा बहुत सम्मान है, लेकिन आप भाजपा के ट्रैप में फंस गई हैं। साल में एक बार आइए, मैं खुद आपको रिसीव करूंगी। लेकिन अगर साल में पचास बार आएंगी तो क्या मेरे पास इतना समय है? मैं लोगों के साथ SIR मुद्दे पर धरने पर बैठी हूं, आपके कार्यक्रम में कैसे जाऊं? आपकी प्राथमिकता बीजेपी हो सकती है, मेरी प्राथमिकता जनता है।'
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि संताली या आदिवासी समाज के लोगों को सभी सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं। इस पर ममता ने पलटवार करते हुए मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाया और पूछा कि जब वहां आदिवासियों पर अत्याचार हो रहा था तब राष्ट्रपति ने विरोध क्यों नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में आदिवासियों पर हमले होने पर चुप रहती हैं, लेकिन बंगाल को ही निशाना बनाया जाता है।
सीएम ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को इस सम्मेलन के आयोजन की जानकारी नहीं थी। ममता ने अपनी सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए चलाई जा रही योजनाओं और अनुदानों का भी उल्लेख किया। सीएम ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय बीजेपी के कहने पर उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि SIR मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कोई टिप्पणी क्यों नहीं की और क्या उन्हें यह जानकारी है कि कितने आदिवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोई योजना है।
साथ ही मुख्यमंत्री ने पार्टी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और डेरेक ओ'ब्रायन को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रपति भवन जाकर राज्य सरकार द्वारा आदिवासी समाज के लिए किए गए विकास कार्यों का पूरा विवरण राष्ट्रपति को सौंपें।