Mamata Banerjee & Sheikh Hasina  
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केंद्र की दोहरी नीति पर ममता ने दागा सवाल

बिना नाम लिये उठाया ‘हसीना’ का मुद्दा

कोलकाता: गुरुवार को न्यूटाउन के एक सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की दोहरी नीति पर सवाल उठाए और मानवता का पक्ष लेते हुए कहा कि किसी की भाषा, धर्म या जाति से नहीं बल्कि उसके कर्म और मानवीयता से पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा, 'आज बांग्ला बोलने वाले लोग केंद्र सरकार की नजर में विदेशी बन गए हैं। हालांकि कुछ लोगों को देश में ‘अतिथि’ बनाकर रखा गया है, मुझे कोई आपत्ति नहीं। इसके पीछे भारत के राजनीतिक और कूटनीतिक कारण हो सकते हैं लेकिन जब बंगाल में काम करने वाले मेहनतकश लोग सिर्फ भाषा के आधार पर विदेशी कहे जाते हैं, तो यह अपमान है।

बंगाल में रहने वाले लोगों की नागरिकता की रक्षा का आह्वान है

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ममता का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर था, जिन्हें 2024 में तख्तापलट के बाद भारत में शरण मिली थी। हालांकि ममता ने कहीं उनका नाम नहीं लिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, बहुत से लोग जो अब ‘बांग्लादेशी’ कहे जा रहे हैं, उनका जन्म ब्रिटिश भारत में हुआ था। ऐसे में अगर वे बांग्ला बोलते हैं, तो क्या वे विदेशी हो गए? उन्होंने सन 1971 के इंदिरा-मुजीब समझौते की याद दिलाते हुए कहा, जो लोग उस वक्त शरणार्थी बनकर आए थे, वे अब भारत के नागरिक हैं। यह ऐतिहासिक सच्चाई है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ममता का यह बयान न केवल बंगाल में रहने वाले लोगों की नागरिकता की रक्षा का आह्वान है, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों की मानवीय समीक्षा की भी मांग करता है।

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