कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी घमासान उस समय और तेज हो गया, जब सोमवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे ने दावा किया कि उसने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित कर ममता बनर्जी को चेयरमैन पद से हटा दिया है।
इतना ही नहीं, बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाने का भी ऐलान किया। न्यूटाउन के एक होटल में हुई बैठक में हावड़ा मध्य के विधायक अरूप राय को नई कार्यसमिति का चेयरमैन चुना गया।
बागी खेमे का दावा है कि तृणमूल के संविधान की धारा 20 के तहत हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन जरूरी है, लेकिन 2022 के बाद यह प्रक्रिया नहीं हुई। इसी आधार पर पुरानी राष्ट्रीय कार्यसमिति को भंग कर 30 सदस्यीय नई एक्जीक्यूटिव कमेटी और 11 सदस्यीय कोर कमेटी बनाई गई।
नई कमेटी में अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम, रथीन घोष और सबीना यासमीन को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। कोषाध्यक्ष का दायित्व अखरुज्जमां को सौंपा गया है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में करीब 60 विधायकों के अलावा कोलकाता के लगभग 70 पूर्व पार्षदों और कई जिलों के बागी पार्षदों की मौजूदगी का दावा किया गया।
बागी खेमे ने इसे “असली तृणमूल” की संगठनात्मक पुनर्रचना बताया है। यह भी पता चला है कि पूरे मामले को लेकर वे जल्द ही चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने वाले हैं। हालांकि, ममता खेमे ने इस पूरी कवायद को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।
तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा, “यह एक कॉमेडी शो है। तृणमूल से निष्कासित एक व्यक्ति विशेष सत्र बुलाकर बैठा है। मामला अदालत में है और हमें पूरा विश्वास है कि न्याय मिलेगा।”