कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों के हस्ताक्षर विवाद मामले में जांच को तेज करते हुए CID ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। सूत्रों के अनुसार, इस SIT की अगुवाई CID के एक डीआईजी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। हालांकि, SIT गठन को लेकर अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
CID सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कई जिलों तक फैली हुई है। विभिन्न जिलों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने और जांच को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए विशेष जांच दल बनाया गया है।
इस मामले की शुरुआत पश्चिम बंगाल विधानसभा की ओर से हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर कोलकाता पुलिस की जांच में CID सहयोग कर रही है।
जांच के सिलसिले में सोमवार दोपहर 12 बजे TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को भवानी भवन स्थित CID मुख्यालय में तलब किया गया है। हाल ही में चुनाव बाद हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान अभिषेक घायल हो गए थे और फिलहाल घर पर हैं। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि वह पूछताछ के लिए CID मुख्यालय पहुंचते हैं या नहीं।
क्या है पूरा हस्ताक्षर विवाद?
4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 6 मई को ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई थी। बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक का चयन पार्टी नेतृत्व करेगा।
इसके बाद शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बनर्जी और असीमा पात्र को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक बनाने का फैसला किया गया। इस संबंध में अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा को भेजा गया, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।
विधानसभा का तर्क था कि संसदीय दल के पदाधिकारियों का चयन संसदीय दल की बैठक में ही होना चाहिए। इसके बाद 19 मई को फिर एक बैठक हुई, जिसमें विधायकों से दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए। आरोप है कि जिन दस्तावेजों पर 19 मई को हस्ताक्षर हुए, उनमें तारीख 6 मई दर्शाई गई थी। यहीं से विवाद शुरू हुआ।
CID अब तक कई विधायकों के घर जाकर पूछताछ कर चुकी है। इनमें नयना बनर्जी, कुणाल घोष, तापस माइती और बाहारुल इस्लाम शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा बाहारुल इस्लाम के हस्ताक्षर को लेकर हो रही है। बाहारुल का दावा है कि 6 मई को वह कालीघाट की बैठक में मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि उस दिन वह अपने घर पर थे और चुनाव बाद हिंसा की स्थिति के कारण किसी बैठक में शामिल नहीं हुए थे।
वहीं, वरिष्ठ TMC नेता और विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि किसी पर हस्ताक्षर करने का दबाव नहीं बनाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि बाहारुल ने दस्तावेज देखकर दावा किया है कि वह हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
अब SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कब और किन परिस्थितियों में किए गए थे तथा क्या किसी तरह की अनियमितता हुई थी।