मध्य प्रदेश में करीब दो दशक बाद एक बार फिर सरकारी बसों का पहिया सड़क पर दौड़ता नजर आएगा। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत करने जा रही है। इस नई परिवहन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और सरकार का लक्ष्य रक्षाबंधन से पहले इसकी शुरुआत करना है।
गौरतलब है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान Babulal Gaur के कार्यकाल में Madhya Pradesh State Road Transport Corporation को भंग कर दिया गया था। इसके बाद राज्य में सरकारी बस सेवा पूरी तरह बंद हो गई और यात्रियों को निजी परिवहन पर निर्भर रहना पड़ा। उस समय सरकार ने लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान और संसाधनों की कमी को इसका प्रमुख कारण बताया था।
अब राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में पुनर्जीवित करने जा रही है। यह सेवा Madhya Pradesh Passenger Transport and Infrastructure Limited के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।
परियोजना के तहत पूरे मध्य प्रदेश को सात परिवहन क्षेत्रों Indore, Ujjain, Bhopal, Jabalpur, Sagar, Gwalior और Rewa में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग सहायक कंपनी बनाई गई है। पहले चरण की शुरुआत जुलाई में इंदौर क्षेत्र से की जाएगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य परिवहन सेवा आम नागरिकों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर जहां आधुनिक सड़क नेटवर्क का विस्तार कर रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाएं नई सरकारी बस सेवा का लाभ उठा सकें।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का भौगोलिक विस्तार काफी बड़ा है और शहरों के बीच लंबी दूरी होने के कारण लोगों को यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ इन चुनौतियों को कम करेगी और राज्य के दूरदराज़ क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। साथ ही पड़ोसी राज्यों से संपर्क भी मजबूत होगा।
सरकार की योजना के अनुसार इंदौर क्षेत्र में तीन श्रेणियों में बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। इनमें शहर के भीतर चलने वाली बसें, विभिन्न जिलों को जोड़ने वाली अंतर-जिला बसें और पड़ोसी राज्यों तक जाने वाली अंतरराज्यीय बस सेवाएं शामिल हैं। अंतरराज्यीय रूटों के माध्यम से Maharashtra, Gujarat, Rajasthan और Uttar Pradesh से संपर्क स्थापित किया जाएगा।
परिवहन विभाग के अनुसार राज्यभर में कुल 620 अंतर-जिला मार्गों की पहचान की गई है, जिन पर 2,432 बसें संचालित होंगी। केवल इंदौर क्षेत्र में ही 121 रूटों पर 608 बसें चलाने की योजना है। इसके अलावा इंदौर शहर और आसपास के क्षेत्रों में 28 रूटों पर 784 बसें संचालित की जाएंगी।
इसी के साथ इंदौर में जुलाई से 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी शुरू होने की संभावना है, जिन्हें PM e-Bus Sewa के तहत चलाया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सातों क्षेत्रों में कुल 1,164 रूट चिन्हित किए गए हैं, जिन पर 5,206 बसों का संचालन प्रस्तावित है। सरकार का मानना है कि नई परिवहन व्यवस्था से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को विशेष लाभ मिलेगा, जिन्हें अभी तक निजी बसों, पिकअप वाहनों और ओवरलोडेड टेम्पो पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार को उम्मीद है कि राज्य संचालित बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को सुरक्षित, सस्ती और विश्वसनीय परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।