नई दिल्ली : भारत सरकार देश में एक बड़ा रणनीतिक ईंधन भंडार बनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार गैस इस्तेमाल करने वाले लोगों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर विचार कर रही है। इस योजना पर करीब 42 अरब डॉलर (लगभग 4 लाख करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है।
जानकार सूत्रों ने बताया कि सरकार पहली बार कच्चे तेल के अलावा एलएनजी और एलपीजी का भी रणनीतिक भंडार बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद युद्ध या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान ईंधन की सप्लाई बाधित होने पर देश की जरूरत पूरी करना है।
कितना महंगा होगी रसोई गैस ?
सरकार LPG यानी घरेलू रसोई गैस पर 1.29 रुपये प्रति किलो का शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। मौजूदा खपत के आधार पर इससे सरकार को हर साल करीब 460 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4375 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इस शुल्क का असर घरेलू गैस सिलिंडर पर भी पड़ेगा। एक सामान्य घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में करीब 18 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
सीएनजी यूजर्स पर भी शुल्क
प्राकृतिक गैस यानी Natural Gas पर सरकार 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर का शुल्क लगाने का प्रस्ताव देख रही है। मौजूदा खपत के आधार पर इससे हर साल करीब 1 अरब डॉलर यानी लगभग 9500 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। दोनों शुल्क से सरकार को कुल मिलाकर करीब 1.5 अरब डॉलर सालाना मिल सकते हैं। इस रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से एलपीजी और एलएनजी के स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में किया जाएगा। हालांकि, यह शुल्क किस तरीके से वसूला जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
गैस बिल करीब 2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क से घरों और अन्य उपभोक्ताओं के गैस बिल में करीब 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे समय में जब ईंधन की कीमतें पहले से ही लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं, सरकार का यह कदम राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।
हालांकि अभी इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है लेकिन यह अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट से मंजूरी मिलना बाकी है।
10 वर्ष लगेंगे मल्टी-फ्यूल रिजर्व तैयार होने में
भारत की यह रणनीतिक ईंधन भंडार योजना करीब 10 साल में पूरी करने की तैयारी है। इसके लिए लगभग 42 अरब डॉलर की जरूरत होगी। इसमें आधे से ज्यादा पैसा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर खर्च होगा, जबकि बाकी रकम ईंधन खरीदकर भंडार में रखने पर खर्च की जाएगी।
सरकार को अगले 10 साल में करीब 2.8 करोड़ टन अतिरिक्त कच्चे तेल की स्टोरेज क्षमता, 90 लाख टन LNG स्टोरेज क्षमता और 40 लाख टन LPG स्टोरेज क्षमता की आवश्यकता होगी।