बेटे के साथ 10 सालों बाद वापसी परिवार से मिली दीपाली तुरी मिर्धा 
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कानूनी अड़चनों के बीच चेन्नई होम में मिले मां-बेटे

हैम रेडियो की पहल से परिवार में लौटी खुशियां,10 साल पहले लापता हुई थी मालदा की महिला

Nidhi Gupta

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : चेन्नई की सड़कों से शुरू हुई एक मां और उसके बच्चे को मिलाने की कहानी आखिरकार मानवता की जीत के साथ पूरी हुई। मालदा के गाजोल (सिदुरबाना) की रहने वाली आदिवासी महिला दीपाली तुरी मिर्धा करीब 10 वर्ष पहले दिल्ली स्टेशन से लापता हो गई थी। लगभग दो साल पहले चेन्नई पुलिस ने मानसिक रूप से अस्वस्थ स्थिति में उसे बरामद किया था। संरक्षण में रहने के दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और कानूनी अड़चनों के कारण मां-बच्चे को अलग रखा गया था। अदालत के आदेश पर उसे सप्ताह में केवल एक बार बच्चे को देखने की अनुमति मिलती थी।

'सुंदरवन' नहीं 'सिदुरबाना' कहने से मिला सुराग

चेन्नई कॉरपोरेशन के 'शेल्टर फॉर अर्बन होमलेस' में इलाज के दौरान दीपाली की स्थिति सुधरी, लेकिन वह सही पता नहीं बता पा रही थी। हैम रेडियो (पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब) की मदद से तलाश शुरू हुई। शुरुआत में महिला द्वारा बोले गए शब्द 'सुंदरवन' के आधार पर खोज की गई, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि वह मालदा के 'सिदुरबाना' गांव का जिक्र कर रही थी। इसके बाद परिवार से संपर्क साधा गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर चेन्नई होम में मां-बेटे का मिलन कराया गया। अब पूरा परिवार बंगाल वापस लौट रहा है।

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