नयी दिल्ली : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों की सदस्यता से जुड़े मामले में संबंधित सांसदों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तेज करने की बात कही है।
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सांसदों की अयोग्यता से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने 20 सांसदों को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं।
टीएमसी का आरोप है कि इन सांसदों ने दूसरी पार्टी से जुड़कर स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। पार्टी के मुताबिक, यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है और इसके आधार पर उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने यह भी मांग की है कि टीएमसी से अलग गुट होने का दावा करने वाले समूह को अलग पहचान, दर्जा या सुविधाएं नहीं दी जाएं। याचिकाओं पर निर्णय में देरी का आरोप लगाते हुए टीएमसी नेता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पार्टी चाहती है कि मामले का निपटारा जल्द हो, ताकि सांसदों की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता दूर की जा सके।
23 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उम्मीद जताई थी कि लोकसभा अध्यक्ष अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर शीघ्र निर्णय लेंगे। पीठ ने कहा था कि अदालत लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की अपनी सीमाओं से अवगत है, लेकिन मामले के जल्द निपटारे की याद दिलाना चाहती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े मामले पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जांच के लिए गठित समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।
रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई और अंतिम निर्णय सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा। फिलहाल, टीएमसी के 20 सांसदों की सदस्यता पर अंतिम फैसला उनके जवाब और निर्धारित प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर निर्भर करेगा।