नई दिल्लीः लोकसभा ने बृहस्पतिवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके तत्काल बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में हुई चर्चा का प्रधानमंत्री द्वारा सदन में जवाब देने की परंपरा है, लेकिन गतिरोध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जवाब लोकसभा में नहीं हुआ और प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के कारण एक बार के स्थगन के बाद बैठक दोपहर 12 बजे शुरू हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कराए।
उन्होंने आसन के समीप प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के सांसदों को बैनर नहीं दिखाने को कहा। शोर-शराबे के बीच ही उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 28 जनवरी को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में दिए गए अभिभाषण पर निचले सदन में लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन के समक्ष रखा। हंगामे के बीच ही सभा ने ध्वनिमत से प्रस्ताव को पारित कर दिया।
गौरतलब है कि बिना प्रधानमंत्री के जवाब के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव 2004 में भी पारित किया गया था तब भाजपा सांसदों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बोलने नहीं दिया था। जयराम रमेश ने इसका एक वीडियो भी साझा किया है।
राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख के किताब-अंश को पढ़ने पर अड़े
धन्यवाद प्रस्ताव के बाद दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर सदन की बैठक दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सदन में धन्यवाद प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सर्वानंद सोनोवाल ने सोमवार को रखा था और इसका अनुमोदन करते हुए भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने अपने विचार रखे थे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण के हवाले से चीन के साथ टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन अध्यक्ष बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी।
चार दिनों से गतिरोध बरकरार
इस मुद्दे पर सदन में पिछले चार दिन से गतिरोध की स्थिति बनी रही। मंगलवार को आसन के समीप हंगामे के दौरान कागज उछालकर आसन की ओर फेंकने के मामले में विपक्ष के आठ सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था। बुधवार को चर्चा में तेलुगु देशम पार्टी के (तेदेपा) के सांसद जीएम हरीश बालयोगी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने हिस्सा लिया। दुबे ने कुछ किताबों का जिक्र करते हुए नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधा और कई तरह के आरोप लगाए। आसन ने दुबे को नियम का हवाला देते हुए किसी किताब को दिखाने या उसका उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी। विपक्ष के सदस्यों ने दुबे के आरोपों पर जोरदार हंगामा किया।