फलता में हुए पुनर्मतदान में, सुबह 11:00 बजे तक 42.83 प्रतिशत वोट डाले गए।
इस निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार अब्दुर रेज्जाक मोल्ला ने फलता स्थित बूथ संख्या 156 पर अपना वोट डाला।
फाल्टा में दोबारा चुनाव के दिन, ‘पुष्पा’—उर्फ जहांगीर—कहीं नहीं मिला। उसके घर और पार्टी दफ़्तर, दोनों के दरवाज़ों पर ताला लगा हुआ था। बार-बार आवाज़ लगाने के बावजूद, अंदर से किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला।
फलता के ‘पुष्पा’ कहे जाने वाले जाहांगिर खान ने आखिरी वक्त में चुनावी मैदान छोड़ दिया। गुरुवार को अधिकांश बूथों पर तृणमूल के एजेंट भी नजर नहीं आए। वहीं, इस स्थिति के बीच बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा काफी उत्साहित और आत्मविश्वास से भरे दिखे।
फलता विधानसभा क्षेत्र के कुछ स्थानीय निवासियों का दावा है कि पिछले कई चुनावों में वे मतदान नहीं कर पाए थे। उन्होंने तृणमूल नेता जाहांगिर खान और उनके समर्थकों पर वोट डालने से रोकने का आरोप लगाया। लोगों का कहना है कि उन्हें उंगली पर स्याही लगने के बावजूद मतदान केंद्र से लौटना पड़ता था। गौरतलब है कि तृणमूल ने इस बार जाहांगिर को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पुनर्निर्वाचन से 48 घंटे पहले उन्होंने चुनाव से हटने का ऐलान कर दिया। हालांकि नामांकन वापसी की समयसीमा गुजर जाने के कारण ईवीएम में उनका नाम और तृणमूल का चुनाव चिन्ह बना रहेगा।
फलता पुनर्निर्वाचन के दिन ‘पुष्पा’ उर्फ जाहांगिर का कोई पता नहीं चला। उनका घर और पार्टी कार्यालय बंद मिला। काफी आवाज लगाने के बावजूद अंदर से किसी ने दरवाजा नहीं खोला।
फलता पुनर्निर्वाचन में सुबह 9 बजे तक कुल 20.47 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है। मतदान को लेकर इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।