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अपोलो कैंसर सेंटर्स में जीवन रक्षक अभियान

स्टमक कैंसर की समय रहते पहचान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की पहल

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : अपोलो कैंसर सेंटर्स ने गत बुधवार को स्टमक कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए विशेष कार्यक्रम “सेव माय स्टमक” की शुरुआत की। यह अभियान स्टमक जिसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है। उसे समय पर स्क्रीनिंग, शुरुआती जांच और सही निदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। पेट का कैंसर आमतौर पर शुरुआती चरणों में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता, जिसके कारण रोगी अधिक देर से उपचार के लिए पहुंचते हैं। ग्लोबोकैन 2020 के अनुसार स्टमक कैंसर विश्वभर में पांचवां सबसे आम कैंसर है, जबकि भारत (4.5%) इस रोग के मामले में छठे स्थान पर है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों, क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण, मोटापा, धूम्रपान, परनिशियस एनीमिया या अधिक नमकीन/अचारयुक्त भोजन लेने वालों की स्क्रीनिंग करना है।

विशेषज्ञों ने बताया, क्यों जरूरी है समय पर जांच

अपोलो कैंसर सेंटर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. सुप्रतीम भट्टाचार्य ने बताया कि “लगातार जलन, अपच या पेट फूलना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती चरण में एक साधारण एंडोस्कोपी से कैंसर की पहचान हो सकती है और इसका इलाज पूरी तरह संभव है। ऑन्को-हिस्टोपैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. संजीबन पात्र ने कहा कि सटीक बायोप्सी रिपोर्ट ही उपचार के लिए निर्णायक होती है। वहीं गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. रजत खंडेलवाल ने बताया कि शुरुआती स्क्रीनिंग से कई रोगियों को बिना कीमोथेरेपी के ही पूर्ण उपचार मिल पाता है। अपोलो कैंसर सेंटर के मेडिकल सर्विसेज निदेशक डॉ. सुरिंदर सिंह भाटिया ने कहा कि पेट का कैंसर अक्सर सामान्य पाचन समस्याओं के रूप में छिपा रहता है, इसलिए लोगों को समय रहते लक्षण पहचानना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एसीसी समुदायों को निरंतर जागरूक करने और कैंसर की रोकथाम को अपनी प्राथमिकता बनाए हुए है। उन्होंने आगे कहा कि ‘सेव माय स्टमक’ कार्यक्रम का उद्देश्य समय रहते जांच कर रोगियों को बड़े ऑपरेशन और महंगी कीमोथेरेपी से बचाना है, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सके।

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