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कोलकाता में बसें नदारद, सरकार शुरू करेगी 'विशेष सेवा'

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों और तकनीकी कारणों से कोलकाता की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। शहर की सड़कों से सैकड़ों सरकारी और निजी बसें गायब हैं, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट को कम करने के लिए राज्य परिवहन विभाग ने व्यस्त रूटों पर 'विशेष सरकारी बसें' चलाने का निर्णय लिया है।

संकट के मुख्य कारण

वर्तमान में परिवहन संकट के दो प्रमुख कारण हैं। पहला, फिटनेस प्रमाण पत्र (CF) की कमी के कारण लगभग 400 सरकारी बसों का परिचालन बंद है। दूसरा, चुनाव ड्यूटी के लिए पुलिस ने बड़ी संख्या में सरकारी और निजी बसों को अधिग्रहित कर लिया है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ईंधन संकट और ऑटो के सीमित परिचालन ने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी है।

इन रूटों पर मिलेगी 'स्पेशल सर्विस'

परिवहन विभाग के अनुसार, डिपो में मौजूद आरक्षित और चालू बसों को सड़कों पर उतारा जाएगा। विशेष सेवाएं मुख्य रूप से हावड़ा-बालीगंज, सियालदह-ठाकुरपुकुर, गरिया-सॉल्ट लेक, बारासात-उलटाडांगा, एयरपोर्ट-हावड़ा और सेक्टर फाइव-सियालदह जैसे व्यस्त रूटों पर उपलब्ध होंगी। यह सेवा विशेष रूप से कार्यालय समय (सुबह और शाम) के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केंद्रित होगी।

उठ रहे हैं सवाल

हालांकि सरकार ने राहत का आश्वासन दिया है, लेकिन यात्री और परिवहन विशेषज्ञ पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। निजी बस मालिकों का दावा है कि अधिकांश गाड़ियाँ चुनाव ड्यूटी में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुछ विशेष बसें चलाने से इस भारी कमी को पूरा करना संभव नहीं है और यह संकट चुनाव परिणाम आने तक जारी रह सकता है।

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