नन्ही टिया अपनी पालतू मिट्ठू की साथ  
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मासूम टिया के 'मिट्ठू' का हुआ डिजिटल एक्स-रे

तोते की बीमारी की रिपोर्ट आई नेगेटिव तो खुशी से झूम उठी छोटी मालकिन

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: बेजुबान जानवरों और बच्चों का रिश्ता बेहद निश्छल और गहरा होता है। इसकी एक बेहद खूबसूरत बानगी कोलकाता के साल्टलेक स्थित 'एनिमल हेल्थ पैथोलॉजी लैब' (AHPL) में देखने को मिली। यहाँ 13 साल की एक मादा तोते (Mithu Parrot) को बेहद नाजुक हालत में जांच के लिए लाया गया था। इस तोते की असल मालकिन कोई बड़ी उम्र की महिला नहीं, बल्कि एक छोटी सी बच्ची 'टिया' है, जो अपने मिट्ठू को खुद से भी ज्यादा प्यार करती है।

नन्ही टिया की आँखों में थे आंसू, मिट्ठू को सता रहा था जानलेवा खतरा

पिछले कुछ दिनों से मिट्ठू की तबीयत ठीक नहीं थी, जिसे देखकर नन्ही टिया बेहद परेशान और उदास थी। परिवार को आशंका थी कि तोते के शरीर के अंदर कोई अंडा फंसा हुआ है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में 'एग बाइंडिंग' (Egg Binding) कहा जाता है। पक्षियों के लिए यह बीमारी अत्यंत दर्दनाक और जानलेवा साबित होती है। अपनी सहेली और पालतू तोते को तकलीफ में देखकर टिया की आँखों में आंसू थे।

रिपोर्ट आते ही दूर हुई तकलीफ, चेहरे पर लौटी मुस्कान

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनिमल हेल्थ पैथोलॉजी लैब (AHPL) के डॉक्टरों ने तुरंत तोते का वेटरनरी डिजिटल एक्स-रे (रेडियोलॉजी टेस्ट) किया। जब एक्स-रे की रिपोर्ट सामने आई, तो वह बेहद राहत भरी थी। रिपोर्ट में साफ़ हो गया कि मिट्ठू के शरीर में कोई अंडा नहीं फंसा है और वह किसी बड़े खतरे में नहीं है।

जैसे ही डॉक्टरों ने पुष्टि की कि उसका मिट्ठू अब खतरे से बाहर है और जल्द ठीक हो जाएगा, नन्ही टिया के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान वापस लौट आई और वह खुशी से झूम उठी।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल इमेजिंग तकनीक से पक्षियों की बीमारियों का समय पर पता लगाना बेहद जरूरी है, ताकि सही इलाज हो सके। इस आधुनिक वेटरनरी डायग्नोस्टिक सेवा की बदौलत आज टिया और उसके मिट्ठू की दोस्ती की जीत हुई।

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