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भ्रष्टाचार आरोपों के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा

कैश बरामदगी मामले में इम्पीचमेंट प्रक्रिया के दौरान अचानक फैसला, अब खत्म होगी हटाने की कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 9 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे पत्र में तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की घोषणा की। अपने इस्तीफे में उन्होंने किसी खास वजह का जिक्र नहीं किया, लेकिन गहरे दुख के साथ पद छोड़ने की बात कही।

जस्टिस वर्मा पर पिछले साल दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद आरोप लगे थे। उस समय वे दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे। लुटियंस दिल्ली स्थित आवास के स्टोर रूम से जली हुई नकदी मिलने का मामला सामने आया था, जिसे लेकर उन्होंने कहा था कि यह पैसा उनका या उनके परिवार का नहीं है और स्टोर रूम तक कई लोगों की पहुंच थी।

मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों की कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को सौंपी। इसके बाद जस्टिस वर्मा से न्यायिक कार्य वापस ले लिया गया और उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।

जुलाई में उनके खिलाफ इम्पीचमेंट प्रक्रिया शुरू हुई थी और लोकसभा स्पीकर ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। अब इस्तीफे के बाद इम्पीचमेंट प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और जस्टिस वर्मा को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पेंशन और अन्य लाभ मिल सकेंगे।

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