केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 
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FIR से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक तीन वर्ष में जरूर मिलेगा न्याय : शाह

नए आपराधिक कानूनों से न्याय व्यवस्था में आएगा बदलाव

Kamlesh Pandey

भोपाल : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था कभी ‘तारीख पर तारीख’ के लिए जानी जाती थी, लेकिन नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष में न्याय दिलाने का पूरा काम हो जाएगा।

भोपाल के भेल क्षेत्र स्थित दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों पर केंद्रित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी।

फॉरेंसिक जांच और तकनीक पर जोर

शाह ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाहित करते हुए फॉरेंसिक जांच के प्रावधान किए गए हैं। इन कानूनों के माध्यम से महिला सुरक्षा, भीड़ हिंसा, गुमशुदा बच्चों और आतंकवाद से नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान किए गए हैं।

भारत में 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम प्रभावी हुए हैं। शाह ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून उनके शासन को बचाने के लिए थे, जबकि नए आपराधिक कानून नागरिकों के सम्मान, संपत्ति और शरीर की रक्षा के लिए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इन कानूनों का मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं। दंड का प्रावधान केवल अपराधियों को अपराध करने से रोकने के लिए है।’’

2029 के बाद मध्यप्रदेश में नशे के लिए जगह नहीं

देशभर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि सरकार ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिससे 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

सहकारिता मंत्रालय को लेकर कांग्रेस पर निशाना

शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आजादी के बाद से कृषि व्यवस्था, ग्रामीण विकास और सहकारिता से जुड़े लोग अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग करते रहे, लेकिन तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी ने 75 वर्षों तक अलग सहकारिता मंत्रालय नहीं बनने दिया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा दी। इसका सबसे बड़ा लाभ गोपालकों को मिलेगा। शाह के अनुसार खुले बाजार में दूध बेचने पर बिचौलिए लाभ का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं, जबकि सहकारिता मॉडल में उनकी भूमिका समाप्त हो जाती है।

‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लिए शुभ संकेत

सम्मेलन में बड़ी संख्या में पहुंचे गोपालकों की ओर इशारा करते हुए शाह ने कहा कि यह मध्यप्रदेश में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लिए शुभ संकेत है।

उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन क्षेत्र महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास और आर्थिक विकास का मजबूत माध्यम है। साथ ही यह कुपोषण से लड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दूध उत्पादन में बढ़ोतरी का दावा

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार का विरोध करने वाले कांग्रेस नेताओं के सवालों का हिसाब देने वह यहां आए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के 75 वर्षों के शासन में देश का दूध उत्पादन 14.60 करोड़ टन तक पहुंचा था, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में यह बढ़कर 25 करोड़ टन हो गया।

शाह ने कहा कि वर्ष 2013-14 में देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 307 ग्राम थी, जो बढ़कर 485 ग्राम हो गई है।

पांच प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में भाजपा सरकार

शाह ने कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला देश है। देश के पांच प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों—उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र—में भाजपा की सरकारें हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने शासन के दौरान पशुपालकों के कल्याण के लिए किए गए कार्यों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारों का ध्यान पशुपालकों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर है।

गोबर से आय बढ़ाने के लिए तैयार होंगे मॉडल

शाह ने कहा कि गोबर के वैज्ञानिक संग्रह, मीथेन उत्सर्जन में कमी और पोषक तत्वों के उपयोग के लिए पांच मॉडल तैयार किए गए हैं। आने वाले दिनों में ऐसा मॉडल विकसित किया जाएगा, जिससे मध्यप्रदेश के हर गांव के गोबर का उचित मूल्य मिल सके।

उज्जैन में 255 करोड़ का दुग्ध संयंत्र

कार्यक्रम के दौरान उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाले संयंत्र का भूमिपूजन किया गया।

वहीं, भोपाल दुग्ध संघ में 17 करोड़ रुपये की लागत से 40 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाला संयंत्र स्थापित किया गया।

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