अमरावती : आंध्र प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकों ने मरीजों के हित और चिकित्सा सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए अपनी हड़ताल अस्थायी रूप से वापस ले ली है। आंध्र प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (एपीजेयूडीए) ने कहा कि वह सरकार से जल्द सकारात्मक जवाब और मांगों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने की उम्मीद कर रहा है।
एपीजेयूडीए के मुताबिक, उच्च न्यायालय ने चिकित्सकों से हड़ताल समाप्त कर मरीजों को चिकित्सा सेवाएं जारी रखने को कहा है। अदालत ने राज्य सरकार को भी कनिष्ठ चिकित्सकों की समस्याओं पर दो सप्ताह के भीतर समाधान निकालने का निर्देश दिया है।
संगठन ने कहा कि अदालत के निर्देश और मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल आंदोलन को रोकने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इसे स्थायी रूप से आंदोलन समाप्त करना नहीं माना जाए।
एपीजेयूडीए ने स्पष्ट किया कि हड़ताल अस्थायी रूप से वापस ली गई है और चिकित्सकों की मांगों को लेकर उसका प्रयास दूसरे लोकतांत्रिक और कानूनी माध्यमों से जारी रहेगा। संगठन ने कहा कि यदि सरकार के साथ बातचीत के जरिए संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो वह आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।
एसोसिएशन ने मंगलवार देर रात जारी बयान में कहा कि उच्च न्यायालय ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में चिकित्सकों के योगदान की सराहना की है और उनकी मांगों को उचित माना है। इससे चिकित्सकों को अपनी मांगों के समाधान की उम्मीद बंधी है।
कनिष्ठ चिकित्सकों की प्रमुख मांग वजीफे में बढ़ोतरी से जुड़ी है। उनका कहना है कि उन्हें मिलने वाले वजीफे और अन्य सुविधाओं की समीक्षा की जानी चाहिए। चिकित्सकों ने दूसरे राज्यों में कनिष्ठ डॉक्टरों को मिलने वाले वजीफे और सुविधाओं के अनुरूप व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
इसके अलावा चिकित्सकों ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। इन मुद्दों को लेकर ही राज्य में कनिष्ठ चिकित्सकों का प्रदर्शन शुरू हुआ था।
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव ने मंगलवार को कहा कि सरकार अन्य राज्यों में कनिष्ठ चिकित्सकों को मिलने वाले वजीफे और सुविधाओं की समीक्षा करेगी। समीक्षा के बाद इस संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा।
सरकार के रुख और उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब चिकित्सकों की नजर अगले दो सप्ताह में होने वाली कार्रवाई पर है। एपीजेयूडीए को उम्मीद है कि इस अवधि में सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाएगी।
हड़ताल वापस लिए जाने से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका फिलहाल टल गई है। चिकित्सकों ने भी स्पष्ट किया है कि मरीजों की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने काम पर लौटने का फैसला किया है।
हालांकि, संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जा सकती है। फिलहाल सरकार और कनिष्ठ चिकित्सकों के बीच बातचीत तथा अदालत के निर्देश के अनुपालन पर सभी की निगाहें टिकी हैं।