लद्दाख में हुई हिंसा की एक फाइल फोटो 
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लद्दाख हिंसा की न्यायिक जांच से ‘पूरी सच्चाई’ सामने आनी चाहिए : खरगे

हिंसा की बरसी पर उठाई जवाबदेही तय करने की मांग

Kamlesh Pandey

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा की पहली बरसी पर न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग की है। खरगे ने कहा कि जांच के जरिए घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए, जवाबदेही तय की जानी चाहिए और बिना किसी भय या पक्षपात के न्याय मिलना चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस लद्दाख के लोगों की उचित संवैधानिक सुरक्षा की मांग के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने संविधान की छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करने की मांग का भी समर्थन किया।

भूमि, रोजगार और संस्कृति की सुरक्षा पर जोर

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा मिलने से क्षेत्र की भूमि, रोजगार, नाजुक पर्यावरण, संस्कृति और पहचान की रक्षा में मदद मिल सकती है। उन्होंने लोकतांत्रिक और प्रतिनिधि संस्थाओं को पूरी तरह बहाल करने की भी मांग की।

लद्दाख में लंबे समय से राज्य का दर्जा और क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को भूमि, संसाधनों और प्रशासन से जुड़े मामलों में अधिक संरक्षण और अधिकार दिलाना है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी पहले लद्दाख को छठी अनुसूची के दायरे में लाने की सिफारिश कर चुका है।

24 सितंबर 2025 को क्या हुआ था? 24 सितंबर 2025 को लेह में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची समेत विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना में 44 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद प्रशासन की ओर से न्यायिक जांच कराई गई। हालांकि, एक साल बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। लद्दाख के आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि गोलीबारी की परिस्थितियां क्या थीं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी थी।

सरकार ने हिंसा पर क्या कहा था?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 24 सितंबर 2025 की घटना के बाद कहा था कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक राजनीतिक दल के कार्यालय और लेह के मुख्य कार्यकारी पार्षद के सरकारी कार्यालय पर हमला किया, आगजनी की तथा सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, 30 से अधिक पुलिस और सीआरपीएफ कर्मी घायल हुए थे और पुलिस ने आत्मरक्षा में गोलीबारी की। सरकार ने हिंसा के लिए प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया था।

मुआवजे की घोषणा, लेकिन जांच रिपोर्ट अब भी सवाल

हिंसा की पहली बरसी से पहले लद्दाख प्रशासन ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए कुल 1.52 करोड़ रुपये के मुआवजे की घोषणा की। चार मृतकों के परिवारों को 15-15 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को तीन-तीन लाख और मामूली रूप से घायल लोगों को एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की गई। इस बीच केंद्र सरकार ने लद्दाख के विभिन्न संगठनों के साथ बातचीत जारी रखने और क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप संवैधानिक सुरक्षा देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। ऐसे में खरगे की मांग के बाद एक बार फिर 24 सितंबर की हिंसा की न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने और घटना की जवाबदेही तय किए जाने का मुद्दा चर्चा में है।

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