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Middle East संकट पर बोले जयशंकर: तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति

राज्यसभा में विदेश मंत्री का बयान—खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार की कड़ी नजर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति को ही समाधान का रास्ता बताया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है, जहां लाखों भारतीय रहते और काम करते हैं।

संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं और भारत का मानना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि पश्चिम एशिया स्थिर बना रहे क्योंकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस संघर्ष का असर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों और वैश्विक ईंधन कीमतों पर पड़ने की बात उठाई।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा संघर्ष में कई लोगों की जान गई है, जिनमें ईरान के शीर्ष स्तर के नेता भी शामिल हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 1 मार्च को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में इस संकट पर चर्चा हुई थी, जिसमें क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों पर संभावित असर पर भी विचार किया गया।

विदेश मंत्री ने कहा कि मध्य पूर्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और खाड़ी क्षेत्र भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है, जहां से हर साल लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है।

उन्होंने दुख जताते हुए बताया कि इस संघर्ष में दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अब भी लापता है। सरकार ने पहले ही भारतीय नागरिकों को ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने और वहां रह रहे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी।

सरकार ने संकट में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए विशेष उड़ानों की व्यवस्था भी की है और हेल्पलाइन शुरू की गई है। जयशंकर ने कहा कि सरकार भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

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