जुलियानो फ्रानितो नये कांसुल जनरल 
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परंपरा से साझेदारी तक : कोलकाता में इटली का नया विजन

इटली के नए कौंसुल जनरल जुलानियो फ्रेनिटो ने कहा

Neha Singh

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : इटली और भारत के बीच संबंध आज एक नए और महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसी व्यापक साझेदारी को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी के साथ इटली के नए महावाणिज्य दूत जुलियानो फ्रानितो ने कोलकाता में अपना कार्यभार संभाला है।

कोलकाता और पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, व्यापारिक संभावनाओं, शिक्षा, कला, पर्यटन और नवाचार को इटली के साथ जोड़ने की दिशा में उनकी कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ हैं। विशेष रूप से युवाओं, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता के अपने पहले अनुभव से लेकर 2027 में प्रस्तावित भारत-इटली संस्कृति एवं पर्यटन वर्ष, व्यापार और निवेश, शिक्षा तथा भारत-यूरोप संबंधों तक—उन्होंने दोनों देशों के बीच रिश्तों के भविष्य को लेकर अपनी दृष्टि साझा की। आइये पढ़ते हैं, उनसे बातचीत के विशेष अंश को :-

1. यह कोलकाता में आपका पहला कार्यभार है। अपने कार्यकाल के दौरान इटली-कोलकाता और इटली-पश्चिम बंगाल संबंधों को मजबूत करने के लिए आपका दृष्टिकोण क्या है?

मैं कोलकाता और पश्चिम बंगाल को इटली तथा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के बीच एक स्वाभाविक सेतु के रूप में देखता हूँ। यह क्षेत्र असाधारण सांस्कृतिक समृद्धि और परंपराओं से संपन्न है, साथ ही इसका आर्थिक, तकनीकी और शैक्षणिक महत्व भी तेजी से बढ़ रहा है।

मेरी प्राथमिकता होगी कि महावाणिज्य दूतावास को संवाद और साझेदारी के एक खुले मंच के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ संस्थान, व्यवसाय, विश्वविद्यालय और सांस्कृतिक संगठन एक-दूसरे से जुड़ सकें, विशेष रूप से युवाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए। मैं विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना चाहूँगा जहाँ हमारे दोनों पारिस्थितिकी तंत्र एक-दूसरे की क्षमताओं के पूरक हो सकते हैं।

मैं कोलकाता से आगे, पूरे वाणिज्यिक एवं कांसुलर क्षेत्र में भी हमारी सहभागिता को गहरा करना चाहता हूँ। इटली के पास इस क्षेत्र को देने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन हमें पूर्वी भारत से सीखने के लिए भी बहुत कुछ है। इसलिए मेरी महत्वाकांक्षा केवल यहाँ इटली को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और दोतरफा साझेदारियाँ स्थापित करना है।

2. दुर्गा पूजा नजदीक है। कोलकाता के सबसे बड़े त्योहार को पहली बार अनुभव करने को लेकर आपकी क्या अपेक्षाएँ हैं?

मैं कोलकाता में पहली बार दुर्गा पूजा का अनुभव करने के लिए बहुत उत्साहित हूँ। अब तक मैं यह समझ चुका हूँ कि यह केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि समुदाय, रचनात्मकता, शिल्पकला, कला और शहर की पहचान की एक अद्भुत अभिव्यक्ति है।

मुझे विशेष रूप से यह बात आकर्षित करती है कि यहाँ परंपरा और आधुनिक रचनात्मकता किस तरह साथ-साथ चलती हैं। पंडाल, मूर्तियाँ, रोशनी, संगीत और हजारों कारीगरों का परिश्रम पूरे शहर को एक विशाल खुले सांस्कृतिक स्थल में बदल देता है। मैं कई पंडालों का दौरा करूँगा, जिनमें से एक का इस वर्ष का विषय रोम शहर को समर्पित है!

3. क्या आपको लगता है कि दुर्गा पूजा और कोलकाता की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को इटली और यूरोप के पर्यटकों के बीच बढ़ावा देने की संभावनाएँ हैं?

बिल्कुल। कोलकाता में अत्यंत समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, जिसे विदेशों में और अधिक जाना जाना चाहिए।

दुर्गा पूजा स्वयं इसका एक प्रभावशाली माध्यम बन सकती है, क्योंकि इसमें ऐसे अनेक तत्व एक साथ दिखाई देते हैं जो यूरोपीय पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक हैं—वास्तुकला, दृश्य कला, हस्तशिल्प, संगीत, खान-पान, इतिहास और समकालीन रचनात्मकता।

4. पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत में इटली के निवेश और व्यावसायिक साझेदारी की सबसे अधिक संभावनाएँ किन क्षेत्रों में हैं?

विशेष रूप से उन क्षेत्रों में काफी संभावनाएँ हैं जहाँ इटली की तकनीकी और औद्योगिक विशेषज्ञता भारत के व्यापक बाजार, प्रतिभा और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से जुड़ सकती है।

मैं उन्नत विनिर्माण और मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, बुनियादी ढाँचे और मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, कृषि-खाद्य एवं खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, डिजाइन और रचनात्मक उद्योगों का उल्लेख करना चाहूँगा। नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष से जुड़े क्षेत्रों में भी संभावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर, इटली-भारत संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 में भी इनमें से कई क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

5. विरासत संरक्षण, कला, वास्तुकला, डिजाइन और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में इटली और कोलकाता किस तरह अधिक निकटता से सहयोग कर सकते हैं?

यह ऐसा क्षेत्र है जहाँ मुझे अपार संभावनाएँ दिखाई देती हैं, क्योंकि इटली और कोलकाता दोनों ही इतिहास, रचनात्मकता और शहरी परिवेश के बीच संबंध को गहराई से महत्व देते हैं।

इटली के पास विरासत संरक्षण, पुनर्स्थापन, संग्रहालय प्रबंधन और ऐतिहासिक इमारतों के नए उपयोग के क्षेत्र में सदियों का अनुभव है। वहीं, कोलकाता के पास अपनी स्वयं की असाधारण स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत है।

हम इटली और भारत के वास्तुकारों, संरक्षण विशेषज्ञों, डिजाइनरों, संग्रहालयों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा दे सकते हैं।

ये सभी प्रयास निश्चित रूप से 2027 में भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष के दौरान कोलकाता को केंद्र में लाने में योगदान देंगे। यह एक ऐसी पहल है जिसकी हाल ही में हमारी दोनों सरकारों ने घोषणा की है और जिसके तहत पूरे भारत में प्रदर्शनियों और कार्यक्रमों का एक व्यापक कैलेंडर आयोजित किया जाएगा—प्रदर्शन कला और संगीत से लेकर सिनेमा, साहित्य, डिजाइन और बहुत कुछ।

यह संस्कृति और पर्यटन को संवाद एवं आपसी समझ के माध्यम के रूप में मनाने का एक अवसर होगा, साथ ही दो ऐसे देशों की समृद्ध विरासत को सामने लाने का प्रयास होगा, जिनके पास मिलाकर 100 से अधिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं।

6. इटली से कोलकाता और पश्चिम बंगाल में पर्यटन बढ़ाने तथा इसके विपरीत पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

पहला कदम अधिक प्रभावी ढंग से दृश्यता बढ़ाना है। हमें यहाँ उपलब्ध अनुभवों की विविधता को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहिए—कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत, बंगाल का खान-पान और हस्तशिल्प, साहित्य और संगीत, सुंदरबन, दार्जिलिंग और व्यापक हिमालयी क्षेत्र।

7. क्या इटली के संस्थानों और पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक एवं शिक्षा संबंधी आदान-प्रदान को मजबूत करने की कोई योजना है?

हाँ। शिक्षा उन सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निवेशों में से एक है जो हम इस संबंध में कर सकते हैं।

इसे आगे बढ़ाने के लिए पहले से एक आधार मौजूद है। भारत के कई विश्वविद्यालयों में इतालवी भाषा और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम चल रहे हैं और हम प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी में कोलकाता में भी इतालवी भाषा की कक्षाओं और कार्यक्रमों को मजबूत करना चाहते हैं।

मैं विश्वविद्यालय-से-विश्वविद्यालय साझेदारियों, संयुक्त शोध तथा छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ते हुए देखना चाहता हूँ।

युवा हमारे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंधों के सबसे महत्वपूर्ण सेतु हैं। प्रत्येक भारतीय छात्र जो इटली में अध्ययन करता है और प्रत्येक इतालवी छात्र जो भारत का अनुभव करता है, दोनों देशों के बीच एक व्यापक मानवीय संबंध का हिस्सा बन जाता है।

8. इतालवी कंपनियाँ और भारतीय व्यवसाय, विशेषकर एसएमई, मजबूत व्यावसायिक साझेदारियाँ कैसे बना सकते हैं?

मुख्य आवश्यकता यह है कि हम कभी-कभार होने वाले व्यावसायिक संपर्कों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारियों की ओर जाएँ।

इतालवी एसएमई की विशेष पहचान विशिष्ट विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और उत्कृष्ट शिल्पकला की मजबूत परंपरा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साझेदारी हमारे डीएनए का हिस्सा है। वहीं भारतीय कंपनियाँ बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, एक गतिशील घरेलू बाजार और तेजी से विकसित हो रहे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र लेकर आती हैं। ये क्षमताएँ एक-दूसरे की अत्यंत अच्छी पूरक हो सकती हैं।

उद्देश्य केवल एक दिशा में निर्यात बढ़ाना नहीं होना चाहिए। हमारा लक्ष्य मिलकर मूल्य का निर्माण करना होना चाहिए—जिसमें उत्पादन, नवाचार और अनुसंधान साझेदारियाँ भी शामिल हों।

हमारा उद्देश्य अब अगले चरण में प्रवेश करना है—अर्थात साथ मिलकर चीजें बनाना। इसमें कंपनियों, स्टार्ट-अप्स और विश्वविद्यालयों के बीच संयुक्त उपक्रम और साझेदारियाँ तथा मजबूत औद्योगिक मूल्य शृंखलाएँ शामिल हैं। अधिक व्यापार और अधिक निवेश हमारा लक्ष्य है।

हम 2029 से पहले 20 अरब यूरो के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, हम जल्द ही भारत में एक इनोवेशन सेंटर भी स्थापित करेंगे, जो दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच संवाद को बढ़ावा देगा।

9. भारत-इटली संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। व्यापक भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी को मजबूत करने में इटली क्या भूमिका निभा सकता है?

इटली आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर भारत और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा सकता है।

भारत और इटली ने हाल ही में अपने द्विपक्षीय संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया है। वहीं, यूरोपीय संघ और भारत ने भी महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताओं का निष्कर्ष भी शामिल है। यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहतर बाजार पहुँच, निवेश और एकीकरण को बढ़ावा दे सकता है।

इटली विनिर्माण, बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा संक्रमण, डिजाइन और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अपनी औद्योगिक ताकत, एसएमई के मजबूत नेटवर्क और विशेषज्ञता के माध्यम से योगदान दे सकता है।

10. आगे देखते हुए, आपके कार्यकाल के दौरान कोलकाता में ऐसी कौन-सी एक बड़ी पहल या उपलब्धि है जिसे आप देखना चाहेंगे?

यदि अपने कार्यकाल के अंत में मैं पीछे मुड़कर देख सकूँ और कह सकूँ कि हमने इटली और इस क्षेत्र के बीच संबंधों का एक अधिक मजबूत और स्थायी नेटवर्क तैयार किया है, तो मैं इसे एक बड़ी उपलब्धि मानूँगा।

मैं अधिक इतालवी और भारतीय कंपनियों को साथ काम करते हुए, अधिक छात्रों को दोनों दिशाओं में यात्रा और अध्ययन करते हुए, अधिक सांस्कृतिक और कलात्मक सहयोग होते हुए तथा पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत को इटली में अधिक प्रमुखता से पहचाने जाते हुए देखना चाहूँगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं चाहता हूँ कि महावाणिज्य दूतावास को ऐसी जगह के रूप में देखा जाए जहाँ लोग अपने विचार लेकर आएँ और उन्हें साझेदार मिलें—चाहे वे उद्यमी हों, शिक्षाविद हों, कलाकार हों, छात्र हों या संस्थान।

मेरी महत्वाकांक्षा केवल कार्यक्रमों की एक सूची पीछे छोड़ने की नहीं है, बल्कि संबंधों और साझेदारियों का एक मजबूत नेटवर्क छोड़ने की है।

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