बच्चे के नाम के साथ जुड़ा सौतेले पिता का नाम
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस राजा बसु चौधरी ने एक मामले में नाबालिग बच्चे के उपनाम और उसके बायोलॉजिकल (असली) पिता का नाम बदले जाने का आदेश दिया है। उसकी मां ने इस बाबत हाई कोर्ट में मामला दायर किया था। जस्टिस चौधरी ने इसके साथ यह शर्त भी जोड़ दिया है कि बच्चा बालिग होने के बाद अगर चाहे तो अपने पिता के नाम और उपनाम को बदल सकता है।
जस्टिस चौधरी ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि वक्त बदल चुका है। अब यह जरूरी नहीं है कि रजिस्टर में बायोलॉजिकल पिता का नाम ही दर्ज किया जाए। एक सिंगल मां भी पिता का नाम दर्ज कराए बगैर अपने बच्चे का लालन पालन कर सकती है। जस्टिस चौधरी ने नगर पालिका को आदेश दिया है कि बच्चे को जन्म प्रमाण पत्र दिया जाए जिसमें उसके सौतेले पिता का नाम दर्ज हो। इसके साथ ही सौतेले पिता के उपनाम को भी बच्चे के नाम के साथ उपनाम के रूप में जोड़ा जाए। पेटीशनर के मुताबिक 2012 में उसका ब्याह एक शख्स के साथ हुआ था जिनका उपनाम कर्मकार था। इसके कुछ साल बाद एक बच्चे का जन्म हुआ था। इसके बाद 2021 में आपसी सहमति के साथ दोनों के बीच तलाक हो गया था। तलाक के बाद 2022 में उसने एक व्यक्ति के साथ ब्याह कर लिया जिनका उपनाम घोष था. इस ब्याह की बकायदे रजिस्ट्री भी की गई थी. बच्चा उसके साथ ही रह रहा है। इसके बाद उसने नगर पालिका में आवेदन किया था कि बच्चे के बायोलॉजिकल पिता का नाम बदलकर वहां पर सौतेले पिता का नाम दर्ज किया जाए. इसके साथ ही उसने आवेदन किया था कि बच्चे के उपनाम कर्मकार को बदलकर घोष कर दिया जाए। नगर पालिका ने इस आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इसकी सुनवाई के बाद जस्टिस राजा बसु चौधरी में उपरोक्त फैसले को सुनाया है।