सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : "बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई " अर्थात सत्संग के बिना हमें विवेक यानी वह ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता जो हमारा कल्याण कर सके और यह सत्संग हमें रामजी की कृपा के बिना प्राप्त नहीं हो सकता। ये उद्गार भागवत मर्मज्ञ मालीराम जी शास्त्री ने पुरुषोत्तम मास के अवसर पर बिका बैंक्वेट उल्टाडांगा में आयोजित सप्तदिवसिय अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात इसके मुख्य यजमान नेचुरल सिटी ग्रुप के प्रमुख महेश कुमार शर्मा, मुकेश-मीनल शर्मा, मनीष-ममता शर्मा सहित उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभाशीष प्रदान करते हुए व्यक्त किए। श्रद्धेय शास्त्री ने कहा कि पुरुषोत्तम मास प्रभु को सर्वाधिक प्रिय मास है, सर्वोत्तम मास है और कथा-सत्संग, दान-धन की दृष्टि से भी इसे अनन्त गुणा फलदायी बताया गया है। ऐसे में इस आयोजन में जो भी शामिल हुए हैं, चाहे वे सशरीर या संचार के माध्यम से उन पर प्रभु की अनन्त कृपा हुई, बस इस कृपा को जीवन में सदा बनाये रखने और इसमें निरंतर वृद्धि के लिए इस कथा का मनन-अनुसरण बेहद जरूरी है। पं. शास्त्री ने इस अवसर पर अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवत पारायण में शामिल सभी विद्वानों का भी स्वागत वंदन किया। प्रसाद के साथ आयोजन सम्पन्न हुआ।