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विश्वविद्यालयों को उद्योगोन्मुख बनाना जरूरी: सुकांत और संजीव

कोलकाता शिक्षा शिखर सम्मेलन में सुधारों पर जोर

कोलकाता : विश्वविद्यालयों को समय के साथ खुद को नया रूप देना होगा और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे। यह बात केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य मंत्री Sukanta Majumdar और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य Sanjeev Sanyal ने कही। वे शुक्रवार को Indian Chamber of Commerce द्वारा आयोजित शिक्षा शिखर सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।

अपने अनुभव साझा करते हुए सुकांत मजूमदार ने, जो University of Gour Banga में वनस्पति विज्ञान के शिक्षक रह चुके हैं, कुलपतियों से पाठ्यक्रम को इस तरह पुनर्गठित करने की अपील की कि छात्रों को बेहतर प्लेसमेंट मिल सके।

संजय सान्याल ने शिक्षा की गुणवत्ता को व्यवहारिक प्रशिक्षण से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कई नियोक्ता ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं जिनके पास बिक्री या कार्य का व्यावहारिक अनुभव हो, बजाय उन स्नातकों के जिनके पास कोई कार्यानुभव नहीं है।

उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े परिसरों की अनिवार्यता अब कम हो गई है और छोटे, अधिक संवादात्मक परिसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। सान्याल ने कहा कि 30 वर्ष से कम आयु के युवाओं में ऑनलाइन शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने और शिक्षकों को शीघ्र कौशल उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने छात्रों को पढ़ाई के साथ काम करने के लिए प्रेरित करने की बात कही, जैसा कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी में प्रशिक्षण के दौरान किया जाता है।

सान्याल ने विदेशी विश्वविद्यालयों को बिना निगरानी भारत में संचालन की अनुमति देने के प्रति भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों को यह साबित करना होगा कि उनकी डिग्रियां प्रासंगिक हैं और वे छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हैं।

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