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ईरान युद्ध ने बढ़ाए तेल के दाम

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के समन्वित हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जंग के हालात से सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया।

न्यू्यॉर्कः ईरान पर अमेरिका और इजराइल के समन्वित हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जंग के हालात से सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान की आशंका से कारोबारियों में बेचैनी देखी गई।

कारोबारी इस आशंका पर दांव लगा रहे हैं कि ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति धीमी पड़ सकती है या ठप हो सकती है। क्षेत्र में हमलों, खासकर फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो जहाजों पर हमले के कारण निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हमले लंबे समय तक जारी रहे तो कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।

वहीं इस बीच, तेल उत्पादक देशों के समूह 'ओपेक प्लस' के आठ सदस्यों ने रविवार को तेल उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने कहा कि वह अप्रैल में प्रतिदिन 2,06,000 बैरल उत्पादन बढ़ाने जा रहा है। उत्पादन बढ़ाने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं।

अमेरिका में उत्पादित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल सोमवार सुबह लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो शुक्रवार के लगभग 67 डॉलर के स्तर से करीब 7.3 प्रतिशत अधिक है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 78.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 72.87 डॉलर से 7.8 प्रतिशत ज्यादा है। शुक्रवार का स्तर सात महीने का उच्चतम स्तर था।

20 फीसदी तेल ईरान के करीब से होकर गुजरता है

ऊर्जा विश्लेषण कंपनी रिस्टैड एनर्जी ने कहा कि प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल यानी वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरुमध्य से होकर गुजरता है। यह तेल मार्ग विश्व का सबसे अहम ‘चोकपॉइंट’ (संकरा रणनीतिक मार्ग) माना जाता है। होर्मुज जलडमरुमध्य के उत्तर में ईरान स्थित है, जबकि इस रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान का तेल एवं गैस निर्यात होता है।

रिस्टैड एनर्जी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जॉर्ज लियोन ने कहा, “वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में बाजार इस बात को लेकर अधिक चिंतित है कि कच्चे तेल की खेप वास्तव में यहां से जा पाएगी या नहीं। यदि खाड़ी क्षेत्र में आवाजाही बाधित होती है तो अतिरिक्त उत्पादन से तत्काल राहत सीमित रहेगी।”

ईरान प्रतिदिन लगभग 16 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीन को जाता है। यदि ईरान का यह निर्यात बाधित होता है तो चीन को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

ओपेक प्लस देश बढ़ाएंगे तेल का उत्पादन

इधर ईरान पर बड़े सैन्य हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर किए जा रहे जवाबी हमलों के बीच तेल उत्पादक समूह 'ओपेक प्लस' के आठ सदस्य देशों ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। इस सैन्य संघर्ष से उपजे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) की रविवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया कि अप्रैल में कच्चे तेल के उत्पादन में प्रतिदिन 2,06,000 बैरल की बढ़ोतरी की जाएगी। यह फैसला विश्लेषकों के अनुमान से अधिक है। उत्पादन बढ़ाने का फैसला करने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं।

ऊर्जा अनुसंधान कंपनी रिस्टैड एनर्जी ने कहा कि प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल यानी वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह तेल आपूर्ति का दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ (रणनीतिक संकरा मार्ग) माना जाता है।

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