मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हुए समाज और दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी लोगों के लिए संतोषजनक जीवन सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति को इसमें अपना योगदान देना चाहिए।
भागवत नागपुर जिले के देओलापुर स्थित ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
RSS प्रमुख ने कहा कि समाज के आकार की तुलना में अच्छे कार्यों में जुटे लोगों की संख्या पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लोगों से सामाजिक कार्यों में अधिक सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, समाज की बेहतरी केवल कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती।
भागवत ने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने के दो तरीके हैं—पहला, उनके बताए रास्ते पर चलते हुए अच्छे काम करना और दूसरा, केवल उन लोगों को याद करते रहना जिन्होंने अच्छे काम किए। उन्होंने कहा कि कई लोग जानते हैं कि समाज के लिए क्या किया जाना चाहिए, लेकिन यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि ऐसा काम कोई और कर देगा।
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए समाज के लिए कुछ करने की अपेक्षा दूसरों से करते हैं। भागवत के मुताबिक, जब समाज में कोई अच्छा बदलाव आता है, तो उसके पीछे सामूहिक योगदान दिखाई देता है।
भागवत ने कहा कि जो लोग निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता का परिचय देते हैं, वे दूसरों को कठिन रास्ते चुनने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा, “जब आप बहुत कुछ देते हैं, तो बदले में आपको बहुत कुछ मिलता भी है।”
RSS प्रमुख ने दिवंगत मोरोपंत पिंगले और VHP नेता अशोक सिंघल का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ने निजी लाभ की चिंता किए बिना बड़े उद्देश्य के लिए अपना जीवन समर्पित किया। समाज कल्याण के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें आगे चलकर प्रमुख नेताओं के रूप में स्थापित किया।
भागवत ने कहा कि वर्तमान में जब भी कोई अच्छा काम होता है, तो दुनिया उन लोगों को याद करती है जिन्होंने अतीत में उसकी शुरुआत की थी। उनके अनुसार, ऐसे लोगों के योगदान को याद करना और उनके कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।