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हॉर्मुज तनाव के बीच भी भारत की तेल आपूर्ति सुरक्षित: केंद्र

सरकार ने कहा—जहां सस्ता मिलेगा वहीं से खरीदेगा भारत; रूस से तेल आयात जारी, भंडार 7–8 हफ्तों के लिए पर्याप्त।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz मार्ग पर खतरे के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर है। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया के किसी भी ऐसे देश से कच्चा तेल खरीदता है जो सबसे प्रतिस्पर्धी और किफायती कीमत देता है।

सरकार के अनुसार India ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक कर दिया है, जिससे वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग उपलब्ध हैं और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।

केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत Russia से कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए है। सरकार ने कहा कि तेल खरीदने के लिए भारत को किसी भी देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

सरकार के मुताबिक India के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का कुल भंडार 250 मिलियन बैरल से अधिक है, जो लगभग सात से आठ सप्ताह की खपत के बराबर है। देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता भी 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो घरेलू मांग से अधिक है।

इस बीच United States और Israel के ईरान पर सैन्य हमलों और Iran की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में शुक्रवार को करीब 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछले एक सप्ताह में यह लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है।

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