नयी दिल्ली : इजराइल-US और ईरान में जारी जंग का असर सीधे भारत की रसोई पर पड़ रहा है। गैस की बढ़ती कमी के बीच भारत ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है जिसके तहत करीब 8 साल बाद भारत ने ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खरीद की है। हालांकि देश भर में पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस के लिए लग रही लंबी लाइनों के बीच सरकार ने गुरुवार को दावा किया कि देश के पास लगभग 60 दिन का ईंधन भंडार है और पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में तनाव प्रभावित हुई गैस की आपूर्ति
सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOL) ने ईरान से LPG की यह खरीद की है, जिसमें उसके साथ भारत पेट्रोलियम (BP) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP)भी हिस्सेदारी कर रहे हैं। यह सौदा इसलिए अहम है क्योंकि भारत ने आखिरी बार जून 2018 में ईरान से LPG खरीदी थी। इसके बाद अमेरिका के सख्त प्रतिबंधों की वजह से यह व्यापार लगभग बंद हो गया था लेकिन अब हालात बदल गये हैं।
जंग के चलते होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) का रास्ता प्रभावित हुआ है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।भारत अपनी LPG की करीब दो-तिहाई जरूरत आयात से पूरी करता है और उसमें से 90 फीसदी सप्लाई इसी क्षेत्र से आती है। ऐसे में जब आपूर्ति शृंखला टूटने लगी तो देश में गैस की किल्लत बढ़ गयी। कई जगह लोगों को मजबूरी में लकड़ी जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है, तो कहीं LPG सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं।
पहले चीन जा रहा था ‘सी बर्ड’ लेकिन फिर भारत की ओर मुड़ गया
बताया जाता है कि इस बार भारत ने करीब 43 हजार टन LPG (ब्यूटेन और प्रोपेन) खरीदी है। हालांकि यह मात्रा भारत की सिर्फ आधे दिन की जरूरत पूरी कर सकती है लेकिन संकट के समय में यह भी बड़ी राहत मानी जा रही है। यह गैस ‘सी बर्ड’ नाम के जहाज के जरिये भारत लायी जा रही है, जो मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचेगी। दिलचस्प बात यह है कि यह जहाज पहले चीन की ओर जा रहा था लेकिन रास्ते में दिशा बदलकर भारत की ओर मुड़ गया। इस बीच भारत दो और LPG खेप लाने की तैयारी में है, जिन पर बातचीत आखिरी चरण में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यापारिक फैसला नहीं बल्कि बदलते वैश्विक हालात में भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति का हिस्सा है। जंग के चलते अगर होर्मुज जैसे अहम रास्ते बंद होते हैं, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
‘कमी की खबर गलत सूचना अभियान'
इस बीच सरकार ने ईंधन की कमी की खबरों को ‘जानबूझकर फैलाया गया गलत सूचना अभियान’ बताया, जिसका उद्देश्य लोगों में दहशत पैदा करना है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश भर के सभी पेट्रोल पंप पर पर्याप्त स्टॉक है और वे सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। पेट्रोल या डीजल की कोई राशनिंग नहीं की जा रही है। मंत्रालय ने बयान में कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के परिशोधन के मामले में दुनिया में चौथे और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भारत, घरेलू ईंधन की उपलब्धता को संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित करता है और 150 से अधिक देशों को परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति करता है। सरकार ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट और कमी या आपातकालीन उपायों के मनगढ़ंत दावे अनावश्यक चिंता पैदा करने के लिए फैलाये जा रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
‘100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही हर रिफाइनरी’
बयान के अनुसार प्रत्येक भारतीय रिफाइनरी (जो कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में परिवर्तित करती है) 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही है। अगले 60 दिन के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा पहले ही सुनिश्चित कर ली गयी है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। मंत्रालय के अनुसार भारत के पास कुल 74 दिन की कच्चे तेल और ईंधन भंडारण क्षमता है।
मंत्रालय ने दावा किया कि पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी, हमारे पास अभी लगभग 60 दिन का वास्तविक भंडार (जिसमें कच्चे तेल का भंडार, उत्पाद भंडार और रणनीतिक भंडारण शामिल है) है। बयान के अनुसार वैश्विक स्तर पर चाहे जो भी हो, प्रत्येक भारतीय नागरिक की जरूरतों को पूरा करने लिए लगभग दो महीने की स्थिर आपूर्ति उपलब्ध है।
व्यवधान होने पर वैकल्पिक स्रोतों से भी आपूर्ति
मंत्रालय ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव के बावजूद कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। जो भी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है, उसकी भरपाई वैकल्पिक स्रोतों से अधिक आपूर्ति के जरिये हो रही है। भारतीय रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से अधिक पर काम कर रही हैं। घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आयात आवश्यकताओं में कमी के कारण LPG की आपूर्ति भी पर्याप्त है। कई देशों से अतिरिक्त कार्गो सुरक्षित कर लिये गये हैं, जिससे निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।