अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दवाइयों, फॉरेंसिक सामान, तंबू और ‘स्लीपिंग बैग’ समेत कुल 11 टन राहत सामग्री की यह नई खेप भारतीय वायुसेना के एक सी-130 सैन्य परिवहन विमान के जरिए शनिवार को काठमांडू पहुंचाई गई। भारत की यह मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) नीति का हिस्सा है, जिसके तहत संकटग्रस्त देशों को प्राथमिकता के आधार पर मदद पहुंचाई जाती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस सहायता सामग्री की तस्वीरें साझा करते हुए अपने संदेश में कहा कि भारत, नेपाल को हाल की आकस्मिक बाढ़ के बाद जनजीवन को दोबारा पटरी पर लाने के प्रयासों में लगातार सहयोग कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस प्राकृतिक त्रासदी से उबरने में नेपाल के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अब तक नेपाल में बचाव, राहत और फॉरेंसिक कार्यों में सहयोग के लिए 130 टन से अधिक की राहत सामग्री भेज चुका है। इसके साथ ही, स्थिति से निपटने के लिए भारतीय विशेषज्ञों के 54 सदस्यीय दल को भी तैनात किया गया है, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों को अंजाम दे रहा है।
भारत की यह त्वरित प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की नीति पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ अमल करता है। भारत सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर नेपाल को भविष्य में भी हरसंभव सहायता मुहैया कराई जाएगी।
नेपाल में हाल ही में आई अचानक भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,410 हो गई है, जबकि 6,100 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
देश के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे, सड़कें और पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में भारी बाधा आ रही है। ऐसे समय में भारत द्वारा भेजी जा रही चिकित्सा सामग्री, तंबू और फॉरेंसिक सहायता से न केवल घायलों के उपचार में मदद मिल रही है, बल्कि बेघर हुए लोगों को फौरी राहत भी मिल रही है।
इस गंभीर संकट के बीच भारत की यह समय पर की गई मदद नेपाल और भारत के ऐतिहासिक एवं गहरे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और अधिक मजबूत करती है।