ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने की जोरदार मांग उठाई है। यूके द्वारा बुलाई गई अंतरराष्ट्रीय बैठक में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में फ्री नेविगेशन और बिना रुकावट व्यापारिक आवाजाही बेहद जरूरी है।
बैठक में 60 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया, जिसका मकसद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के रास्ते तलाशना था ताकि ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहे असर को कम किया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं हुआ।
विक्रम मिस्री ने कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में मर्चेंट शिपिंग पर हुए हमलों में भारत ही एकमात्र देश है जिसने अपने नाविकों को खोया है। शुरुआती दिनों में हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों समेत आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है।
भारत ने बैठक में साफ कहा कि इस संकट का हल केवल तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति के रास्ते से ही निकल सकता है। भारत ने सभी पक्षों से शांति और संवाद की अपील की। ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि यह बैठक राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान पर केंद्रित थी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दिखाती है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षित और मुक्त समुद्री व्यापार का समर्थन करता है और हॉर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जिन देशों को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है, वे अमेरिका से तेल खरीद सकते हैं या खुद हिम्मत दिखाकर सप्लाई सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अपने आप खुल जाएगा।