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भारत ने इस तरह की ईरानी नौसेना की मदद

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच चार मार्च को कोच्चि पहुंचे एक ईरानी युद्धपोत के चालक दल के कुछ सदस्यों को भारत ने उनके देश वापस भेज दिया है।

नई दिल्लीः ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच चार मार्च को कोच्चि पहुंचे एक ईरानी युद्धपोत के चालक दल के कुछ सदस्यों को भारत ने उनके देश वापस भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि पोत ‘आइरिस लावन’ के कोच्चि में होने के कारण उसके चालक दल के 183 सदस्यों में से 50 से अधिक सदस्य वहीं रुके हुए हैं।

उन्होंने बताया कि गैर-आवश्यक कर्मी तुर्किये की एक विमानन कंपनी के विमान से भारत से रवाना हुए। यह विमान कल देर रात कोच्चि पहुंचा। विमान चार मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिका की एक पनडुब्बी द्वारा डुबोए गए एक अन्य युद्धपोत के 80 से अधिक ईरानी नाविकों के शव कोलंबो से लेकर यहां आया।

‘आइरिस लावन’ चार मार्च से कोच्चि में ही है। पोत में कोई तकनीकी दिक्कतें आने पर ईरानी पक्ष के अनुरोध के बाद एक मार्च को इसे आपातकालीन ‘डॉकिंग’ की मंजूरी दी गई। जानकारी मिली है कि ‘आइरिस लावन’ पर तैनात ईरानी कर्मी आर्मेनिया की राजधानी येरेवान से सड़क मार्ग के जरिये ईरान जाएंगे।

चालक दल के सदस्यों को ऐसे समय में वापस भेजा गया है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर इस समय मौजूद भारतीय ध्वज वाले 24 से अधिक वाणिज्यिक पोतों के सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार रात अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से बात की जो पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से उनकी चौथी बातचीत थी।

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