नई दिल्ली: भारत और जर्मनी के बीच भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी की छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण से जुड़े बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट-75I समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने गुरुवार को कहा कि इस रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अगले महीने तक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
नई दिल्ली में भारत-जर्मनी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (IGCC) के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में एकरमैन ने कहा, "पनडुब्बी समझौते को लेकर मैं बेहद आशान्वित और आश्वस्त हूं कि इस पर बहुत जल्द, संभवतः अगले महीने हस्ताक्षर हो जाएंगे।"
करीब आठ अरब यूरो (90,000 करोड़ रुपये से अधिक) मूल्य वाले इस रक्षा सौदे के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। यह परियोजना भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगी।
इस परियोजना के तहत जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के बीच साझेदारी प्रस्तावित है। दोनों कंपनियां मिलकर भारत में पनडुब्बियों का निर्माण करेंगी।
प्रोजेक्ट-75I भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। इस परियोजना से नौसेना की पनडुब्बी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक ताकत को नया बल मिलेगा।