भारत ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का गुप्त परमाणु प्रसार का इतिहास उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब तुलसी गबार्ड ने अमेरिका के लिए प्रमुख परमाणु खतरों में पाकिस्तान का नाम शामिल किया। उन्होंने 2026 की वार्षिक खतरा आकलन रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान उन्नत मिसाइल प्रणालियों का विकास कर रहे हैं, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं।
गबार्ड ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि पाकिस्तान लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम कर रहा है, जिनमें अंतरमहाद्वीपीय क्षमता भी शामिल हो सकती है। इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने कहा कि देश का परमाणु कार्यक्रम केवल “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध” के लिए है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने में अब्दुल कदीर खान की अहम भूमिका रही, जिन पर परमाणु तकनीक के प्रसार के आरोप लगते रहे हैं। मौजूदा बयानबाजी ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है।