प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक बदलाव के बाद भारत-बांग्लादेश जल कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। इसी पृष्ठभूमि में 1996 गंगा जल बंटवारा संधि को लेकर भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग (Joint River Commission) की अहम बैठक कोलकाता में शुरू हो गई है। 30 साल की इस संधि की वैधता इस वर्ष के अंत में समाप्त होने वाली है, ऐसे में दोनों देशों के बीच जल बंटवारे की समीक्षा और भविष्य की रूपरेखा तय करने के लिए यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक का आयोजन 20 मई से 23 मई तक कोलकाता में किया जा रहा है। बैठक से पहले बांग्लादेश के 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने फरक्का बैराज का दौरा किया और गंगा नदी के जल प्रवाह और मापन प्रणाली की तकनीकी समीक्षा की। इसके बाद कोलकाता में औपचारिक वार्ता शुरू हुई। बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद अनवर कबीर कर रहे हैं। भारतीय पक्ष से जल संसाधन मंत्रालय और पश्चिम बंगाल के सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं।
चर्चा के केंद्र में जल प्रवाह के आंकड़ों की पारदर्शिता, तकनीकी मूल्यांकन और संधि के नवीनीकरण की संभावनाएं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जल बैठक है, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों की आगामी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। सूत्रों के अनुसार, तकनीकी और कूटनीतिक बैठकों के बाद बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मुलाकात कर सकता है।