केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : भारत और बांग्लादेश के बीच नई दिल्ली में संपन्न चार दिवसीय महानिदेशक (डीजी) स्तर की वार्ता में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और सीमा-पार अपराधों पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों देशों ने सीमा पर शांति, स्थिरता और बेहतर समन्वय बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था, संयुक्त गश्त तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों देशों में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद आयोजित यह पहली उच्चस्तरीय सीमा वार्ता थी।
अवैध गतिविधियों पर रहा फोकस
8 से 11 जून तक बीएसएफ मुख्यालय में आयोजित 57वें सीमा समन्वय सम्मेलन में मादक पदार्थों, हथियारों, नकली मुद्रा, सोने तथा अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी रोकने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मानव तस्करी और अवैध सीमा-पार गतिविधियों पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई।
सीमा पार घटनाओं पर चिंता
दोनों पक्षों ने सीमा पर होने वाली मौतों तथा अवैध, अनजाने और जबरन सीमा पार करने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। भारत-बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से 2,216 किलोमीटर से अधिक हिस्सा पश्चिम बंगाल में पड़ता है। ऐसे में राज्य की सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के संदर्भ में यह बैठक विशेष महत्व रखती है।
नवंबर में होगा वार्ता का अगला दौर
दोनों देशों ने समन्वित गश्त, रीयल-टाइम सूचना साझाकरण तथा सीमा-पार आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई को और तेज करने का निर्णय लिया। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को जागरूक बनाने पर भी सहमति बनी। सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई इस वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने सहयोग और आपसी विश्वास को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सम्मेलन का अगला दौर नवंबर में ढाका में आयोजित होने की संभावना है।