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काली पूजा से पहले केसरिया मोमबत्तियों की बढ़ी मांग

Khodija Khatun (Rabia)

सिलीगुड़ी

काली पूजा और दिवाली से पहले बाजारों में रंग-बिरंगी मोमबत्तियों की मांग बढ़ने लगी है। इस बार केसरिया रंग की मोमबत्तियां खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए राजगंज के एक छोटे मोमबत्ती निर्माता ने केसरिया मोमबत्तियों का उत्पादन बढ़ा दिया है। हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और इलेक्ट्रिक सजावटी लाइटों से मिल रही प्रतिस्पर्धा के कारण कारोबारियों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं।

राजगंज ब्लॉक के माझियाली ग्राम पंचायत अंतर्गत पाथरघाटा गांव निवासी शीतल सरकार पिछले 10-12 वर्षों से अपने घर में ही मोमबत्ती बनाने का काम कर रहे हैं। काली पूजा नजदीक आने के साथ उनकी छोटी उत्पादन इकाई में काम तेज हो गया है। उनके साथ तीन से चार श्रमिक भी उत्पादन में सहयोग करते हैं। यहां छोटी, मध्यम और बड़ी मोमबत्तियों के अलावा स्टैंड वाली मोमबत्तियां भी तैयार की जाती हैं। विभिन्न रंगों में बनने वाली इन मोमबत्तियों की त्योहारों के दौरान विशेष मांग रहती है।

शीतल सरकार के अनुसार, वह हर साल की तरह इस बार भी मोमबत्तियां बना रहे हैं, लेकिन कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कुल मांग और बिक्री पर थोड़ा असर पड़ा है। इसके बावजूद काली पूजा के समय रंगीन मोमबत्तियों की मांग बढ़ जाती है। इस साल केसरिया रंग की मोमबत्तियों के प्रति ग्राहकों की दिलचस्पी अधिक होने के कारण इनके उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उनकी इकाई में एक रुपये से लेकर 25 रुपये तक की मोमबत्तियां तैयार होती हैं। दो और पांच रुपये वाली मोमबत्तियों की मांग पूरे साल बनी रहती है, जबकि काली पूजा और दिवाली के दौरान रंगीन मोमबत्तियों की बिक्री बढ़ जाती है। यहां तैयार उत्पाद सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और हल्दीबाड़ी समेत आसपास के विभिन्न बाजारों में भेजे जाते हैं।

कारीगर का कहना है कि बढ़ती लागत और इलेक्ट्रिक सजावटी लाइटों के चलन के बीच कारोबार चलाना पहले की तुलना में कठिन हुआ है। इसके बावजूद त्योहारों से पहले बढ़ी मांग को देखते हुए उन्हें बेहतर बिक्री की उम्मीद है।

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