निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : "हैम मतलब—हेल्प ऑलवेज मैनकाइंड" (HAM - Help Always Mankind)। इस नारे को एक बार फिर चरितार्थ किया है वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सदस्यों ने। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर, जहाँ लाखों श्रद्धालु पुण्य स्नान कर अपने घरों को लौट चुके हैं, वहीं अपनों से बिछड़कर सागर तट पर भटक रही उत्तराखंड की रजनी शर्मा को आखिरकार उनका परिवार मिल गया। यह सफलता हैम रेडियो के सदस्यों और सिविल डिफेंस की अटूट मेहनत का परिणाम है।
रजनी शर्मा इस वर्ष गंगासागर मेले में पुण्य स्नान की इच्छा लेकर आई थीं। लाखों की भीड़ में वह अपने परिजनों से बिछड़ गईं। मानसिक तनाव और अकेलेपन के कारण उनकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि वह कभी खुद से बातें करतीं, कभी नाचने लगतीं तो कभी रोने लगती थीं। पिछले कई दिनों से वह स्थानीय दुकानदारों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्भर थीं और कचूबेरिया लॉन्च घाट के पास अपना समय काट रही थीं।
कचूबेरिया घाट पर तैनात एक सिविल डिफेंस कर्मी की नज़र जब इस महिला पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब को दी। सागर थाने के प्रभारी ने हैम रेडियो के प्रतिनिधि और शिक्षक दिवस मंडल को मामले की जानकारी दी। रजनी से बात करना आसान नहीं था; वह कभी अपना घर राजस्थान बतातीं, तो कभी हरियाणा या दिल्ली।
दिवस मंडल ने धैर्यपूर्वक उनसे कई दौर की बातचीत की। इसी दौरान रजनी ने एक स्कूल और उसके प्रिंसिपल का नाम लिया। जब उस पते पर संपर्क किया गया, तो पता चला कि वहां उनका कोई नहीं है—माता-पिता और भाई की मृत्यु हो चुकी थी। शादी के सवाल पर वह भड़क जाती थीं और कहती थीं, "वह मुझ पर बहुत अत्याचार करता है, मैं घर नहीं जाऊंगी।"
लगातार प्रयासों के बाद हैम रेडियो के सदस्यों ने उत्तराखंड के हरिद्वार (सुभाषगढ़) में उनकी बहन रिम्पी शर्मा को खोज निकाला। बहन ने बताया कि रजनी का पति और बच्चे हैं और वह करीब एक साल पहले घर से लापता हो गई थीं।
जब हैम रेडियो के माध्यम से पति और बच्चों से वीडियो कॉल पर बात कराई गई, तो रजनी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह सबके सामने खुशी से नाचने लगीं और गाने गाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उनके चेहरे की वह मुस्कान देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सचिव अम्बरीश नाग विश्वास ने बताया कि रजनी अब अपने पति के साथ घर वापस जाएंगी। उन्होंने सिविल डिफेंस और हैम रेडियो के सदस्यों को इस सफल मिशन के लिए धन्यवाद दिया। विश्वास ने भावुक होते हुए कहा, "एक रजनी तो घर लौट रही है, लेकिन अब भी न जाने कितनी 'रजनी' सागर तट पर अपनों का इंतज़ार कर रही होंगी। हैम रेडियो के सदस्य तब तक जागते रहेंगे, जब तक हर बिछड़ा हुआ शख्स अपने घर न पहुँच जाए।"
यह घटना साबित करती है कि तकनीक और मानवीय संवेदनाएं मिलकर किसी भी खोई हुई मुस्कान को वापस ला सकती हैं।