निधि, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : नौकरी की भागदौड़ और रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच मध्य हावड़ा के नस्करपाड़ा निवासी अभिजीत हाजरा ने अपनी छत पर कमल उगाने का अनोखा काम शुरू किया था। कभी खाली समय में लगाए गए एक पौधे से शुरू हुआ यह सफर आज 120 गमलों में 30 दुर्लभ और मनमोहक प्रजातियों के कमल वाटिका में तब्दील हो चुका है। अभिजीत की छत पर रोजाना खिलने वाले गुलाबी, सफेद और विविध रंगों के ये खूबसूरत फूल इस बार दुर्गापूजा में नस्करपाड़ा में नवीन सेनापति रोड की पूजा समिति के एक विशेष पूजा पंडाल के थीम बने हैं। आयोजकों ने इस प्रकृति प्रेमी की अनोखी बागवानी से प्रेरित होकर पूरे पंडाल को अभिजीत की कमल वाटिका का रूप दिया है, ताकि आम लोग भी इन दुर्लभ प्रजातियों की खूबसूरती को करीब से देख सकें।
पर्यावरण सुरक्षा के साथ मिलेगा अलौकिक अनुभव
अभिजीत हाजरा ने बताया कि नौकरी की व्यस्तता के बाद जो चीज उन्हें सुकुन देती थी वह था कमल यह फूल। उन्होंने ऐसे ही गमले में एक दिन कमल का पौधा लगाया जो खिल उठा और इसे देख उन्हें एक अनोखा अनुभव हुआ। उन्होंने फिर छत पर ही कमल के पौधों को उगाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि अपने घर की छत की इस कमल वाटिका में वे प्रकृति से सीधे जुड़ जाते हैं। साथ ही इस बागवानी के लिए हर दिन चार घंटे का समय देते हैं और मौसम की परवाह किए बिना सुबह चार बजे उठते हैं। इस सफर में उनकी पत्नी मिताली हाजरा भी उनका पूरा साथ देती हैं। केवल खूबसूरती ही नहीं, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उन्होंने गमलों के पानी में गप्पी मछलियां पाल रखी हैं, जो मच्छरों के लार्वा को खत्म कर डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा कम करती हैं। उनके द्वारा उगाए गए कमल अब राज्य के बाहर भी भेजे जाते हैं। दुर्गापूजा और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में खुद के उगाए कमल अर्पित करने वाले इस दंपति के फूलों का संसार अब सार्वजनिक रूप से पूजा पंडाल में सजेगा। अभिजीत और उनकी पत्नी की सालों की मेहनत, कलात्मक सोच और प्रकृति प्रेम का यह नजारा इस बार श्रद्धालुओं को एक अलग और अलौकिक आध्यात्मिक अहसास कराने के लिए तैयार है।