कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय में बुधवार की मध्यरात्रि हुई हिंसा के बाद प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद बाहरी लोग कैंपस में घुसे और छात्रों को धमकाने के साथ ही उनसे मारपीट की। सवाल है कि मुख्य द्वार किसने खोला?
तुलनात्मक साहित्य के छात्र तनुज मल्लिक ने कहा, “बाहरी लोग आधी रात कैंपस में कैसे घूम सकते हैं? उन्होंने हमें धमकाया, डराया और मारपीट की। प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।” रिसर्च स्कॉलर अनुष्का चटर्जी ने आरोप लगाया, “हमारे दोस्तों को घसीटकर बेरहमी से पीटा गया। हम मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन किसी ने हमारी कॉल तक नहीं उठाई।”
घटना के विरोध में वामपंथी छात्रों ने गुरुवार को प्रो-वाइस चांसलर का घेराव कर बाहरी लोगों की पहचान और कार्रवाई की मांग की। वहीं, एबीवीपी ने ज्ञापन देकर पुलिस जांच की मांग की। एबीवीपी समर्थक मंजुनाथ शर्मा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा, “हमें नहीं पता वे लोग कौन थे, लेकिन हम बुधवार की रात कैंपस में नहीं थे।”
उन्होंने विश्वविद्यालय में कथित ‘राष्ट्रविरोधी’ गतिविधियों का आरोप भी लगाया। पुलिस के अनुसार, छात्रों ने 100 डायल पर मदद मांगी थी, लेकिन कुलपति और रजिस्ट्रार से संपर्क नहीं हो सका। प्रोफेसर मानस घोष ने प्रशासन की चूक स्वीकार करते हुए सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और न्यायिक जांच की मांग की।
पूर्व कार्यवाहक कुलपति बुद्धदेव साव ने भी प्रशासन को छात्रों की सुरक्षा में विफल बताया। प्रशासन ने आंतरिक जांच समिति गठित कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बाहरी लोगों की पहचान और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। भाजपा विधायक शर्बरी मुखोपाध्याय पर भी छात्रों ने धमकाने का आरोप लगाया है। पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है