इराक के बसरा के पास फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी स्वामित्व वाले कच्चे तेल के टैंकर पर हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। भारतीय दूतावास ने जानकारी दी कि सभी बचाए गए नाविकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है और दूतावास लगातार इराकी अधिकारियों के संपर्क में है।
हमला 11 मार्च 2026 को मार्शल आइलैंड के झंडे वाले टैंकर “Safesea Vishnu” पर हुआ, जिसका स्वामित्व अमेरिका की कंपनी Safesea Transport Inc. के पास है। इसी हमले में माल्टा के झंडे वाले दूसरे टैंकर “Zefyros” को भी नुकसान पहुंचा। ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन के जरिए दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ‘सुसाइड’ नाव में लगाए गए विस्फोटकों से भी जहाजों पर हमला किया गया हो सकता है। मामले की जांच अभी जारी है। इस बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास भी तीन अन्य व्यावसायिक जहाजों को “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” से निशाना बनाए जाने की खबर है। इनमें से एक जहाज संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास, दूसरा ओमान के उत्तर में और तीसरा दुबई के उत्तर-पश्चिम में क्षतिग्रस्त हुआ।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया है कि उसकी सेना ने जलडमरूमध्य में ईरान के 16 माइन बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया है।
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 12वें दिन में पहुंच चुका है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 31 प्रतिशत है। यदि यह मार्ग बंद होता है तो चीन, भारत और जापान जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है और दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका है।