नई दिल्लीः मुस्लिम कट्टरपंथ की दलदल में बुरी तरह धंस चुके बांग्लादेश में एक और हिंदू की जान चली गई। पिछले 18 दिनों में कट्टरपंथी मुस्लिम जेहादियों ने छठे व्यक्ति की मौत का घाट उतार दिया। एक दुकानदार की उस समय हत्या कर दी गई जब वह एक व्यस्त बाजार में अपनी दुकान पर बैठा था।
मृतक की पहचान शरत चक्रवर्ती मणि के रूप में हुई है जो नरसिंगडी जिले के चारसिंदूर बाजार में व्यवसाय करता था। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शरत सोमवार की रात अपनी दुकान में व्यस्त था तभी कुछ लोग अचानक आये और उस पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। उसे गंभीर हालत में कुछ लोग निकट के अस्पताल ले गये लेकिन वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। शरत के शरीर पर धारदार हथियारों से कई हमले किये गये थे, जिससे अधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी मौत हो गयी।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शरत से कुछ दिनों पहले कुछ लोगों ने बड़ी रकम की मांग की थी। उन्होंने उसे कहा था कि अगर बांग्लादेश में रहना है तो उसे जजिया टैक्स देना होगा।
बांग्लादेश की वर्तमान अवस्था पर चिंतित था शरत
मृतक शरत चक्रवर्ती के बारे में जानकारी है कि पहले दक्षिण कोरिया में कोई काम कर रहा था और कुछ अरसा पहले अपने देश बांग्लादेश लौटा था। पिछले साल से जारी बांग्लादेश की हिंसा को लेकर वह चिंतित था और 19 दिसंबर को उसने फेसबुक पोस्ट में अपनी चिंता प्रकट की थी। उसने लिखा था- "मौत की घाटी में इतनी आग, इतनी हिंसा... मेरी मातृभूमि।" शरत के परिवार में उसकी पत्नी अंतरा मुखर्जी और 12 साल का बेटा अभिक चक्रवर्ती हैं।
एक हिंदू का रक्त सुखा नहीं कि दूसरे हिंदू की हत्या
परिवार के सूत्रों का कहना है कि शरत का किसी से किसी प्रकार की दुश्मनी नहीं थी। वह बहुत साधारण तरीके से अपना जीवन जी रहा था। हालांकि वह देश की वर्तमान अवस्था को लेकर बेहद चिंतित रहता था। उसके एक पड़ोसी ने मीडिया को बताया कि शरत एक सामाजिक व्यक्ति था। एक अच्छा पड़ोसी था। उसकी हत्या का कारण यही समझ में आता है कि वह एक हिंदू था।
बांग्लादेश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता बाप्पादित्य बसु ने शरत की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि बांग्लादेश में जब तक एक हिंदू का रक्त सूखता है, तब तक दूसरे हिंदू का रक्त बहा दिया जा रहा है। उन्होंने पत्रकार राणा प्रताप का जिक्र किया जिनकी कुछ घंटे पहले ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। बसु चेतावनी देते हुए कहते हैं कि बांग्लादेश में इस तरह से अगर हिंदुओं को निशाना बनाया जाता रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में यहां एक भी हिंदू नहीं बचेगा।
इंडिया या नरेंद्र मोदी भी कुछ नहीं कर सकता
सामाजिक कार्यकर्ता बाप्पा दित्य बसु ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार पर हिंदुओं की हत्या को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ऐसे देश में हिंदू होना ही मारे जाने का एक बड़ा कारण बन जाता है, जहां "हिंदुओं का नरसंहार या जातीय सफाया एक साफ सरकारी योजना के तहत किया जा रहा है"।
बसु ने एक मीडिया को दिये इंटरव्यू में शरत से पैसे की मांगने की धमकी का उल्लेख करते हुए कहा कि बदमाशों ने शरत को धमकी देते हुए कहा था कि अगर उसने पुलिस में कोई शिकायत की, तो वे उसकी पत्नी को किडनैप कर लेंगे। चरमपंथियों ने यह भी कहा, "पैसे चुपचाप दे दो। इस बारे में कोई हंगामा मत करो। अगर तुम्हारा इंडिया या तुम्हारा नरेंद्र मोदी भी आ जाए, तो भी वे जजिया टैक्स की वसूली को नहीं रोक पाएंगे।"