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बकरीद से पहले पशु वध नियम पर हाई कोर्ट में घमासान, कानून पर उठे कई सवाल

राज्य के प्रतिबंध पर कई याचिकाएं, कोर्ट बोला– कानून लागू था तभी तो इतने केस

बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में पशु वध पर राज्य सरकार के नियमों को लेकर Calcutta High Court में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। गुरुवार को सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील Bikash Ranjan Bhattacharya ने दलील दी कि अगर कोई कानून लंबे समय तक लागू नहीं किया जाता, तो उसकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि कानून लागू नहीं होता, तो इतने मामले अदालत में आते ही नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि हर साल इस संबंध में अधिसूचना जारी होती रही है।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य ने अदालत को बताया कि केवल 14 वर्ष से अधिक आयु या स्थायी रूप से अक्षम पशुओं को ही वध के लिए उपयुक्त माना जाएगा।

याचिकाकर्ताओं की आपत्ति

याचिकाकर्ता Ramakrishna Pal ने मांग की कि गाय वध पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। वहीं Mohammad Zafar Yasni ने कहा कि सरकार स्पष्ट गाइडलाइन जारी करे और अधिकृत बूचड़खानों की सूची सार्वजनिक करे, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

कानून और व्यवस्था पर सवाल

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 1950 के कानून के तहत ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ जरूरी है, लेकिन राज्य में इसके लिए पर्याप्त ढांचा ही मौजूद नहीं है। यह भी कहा गया कि अचानक लिए गए फैसले से आम लोगों और पशु व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है।

नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग

मोहम्मद शकील वारसी की ओर से उनके वकील Sabyasachi Chatterjee ने राज्य के नोटिफिकेशन को रद्द करने और कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने की मांग की।

अदालत की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि यह कहना उचित नहीं होगा कि कानून लागू नहीं था, क्योंकि हर साल इससे संबंधित अधिसूचना जारी की जाती रही है।

फिलहाल इस मुद्दे पर सुनवाई जारी है और बकरीद (28 मई) से पहले इस पर क्या अंतिम निर्णय आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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