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हिंदू बांग्लादेशी महिला को हाइ कोर्ट से नहीं मिली राहत

आपरधिक मामला खारिज करने से किया इनकार

 जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : एक बांग्लादेशी हिंदू महिला को हाई कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। उसके खिलाफ इमिग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट के तहत एक आपराधिक मामला दायर किया गया है। उसने इसे खारिज किए जाने के लिए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। उसके खिलाफ आरोप है कि वह उपयुक्त विसा के बगैर ही भारत में रह रही थी। जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी ने उसकी अपील को खारिज कर दिया।

एडवोकेट घनश्याम पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पीटिशनर थाने में अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने गई थी। पर पुलिस ने उसके खिलाफ ही मुकदमा दायर कर दिया। जस्टिस मुखर्जी ने अपने आदेश में कहा है कि धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर वह सांविधिक सुरक्षा पाने की हकदार है या नहीं इसका फैसला ट्रायल के दौरान होगा। जस्टिस मुखर्जी ने अपने आदेश में कहा है कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2024 से पहले आने वाले अल्पसंख्यकों को छूट मिली है। पर अभियुक्त को यह साबित करना पड़ेगा कि वह इस छूट को पाने का हकदार है। इसके साथ ही कहा है कि पीटिशनर के बयान को राज्य सरकार की तरफ से चुनौती दी गई है। इसलिए साक्ष्य के आधार पर ट्रायल के दौरान ही इसपर विचार हो सकता है। पीटिशनर शंपा सरकार बांग्लादेश के खुलना से भारत आई थी। उसके खिलाफ बनगांव थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पीटिशनर के मुताबिक वह 2024 में सात दिसंबर को इस राज्य में आई थी। उसके पास बांग्लादेशी पासपोर्ट और विसा था। इसके बाद उसने यहां एक भारतीय युवक से ब्याह रचा लिया और यहीं बस गई।


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